
ओडिशा में जनजातीय और दूरदराज़ क्षेत्रों के लोगों को न्याय से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम कदम उठाए हैं।राष्ट्रीय विधिक सेवा संस्थानों के सहयोग से निःशुल्क कानूनी सहायता का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है, ताकि संसाधनों और कानूनी जागरूकता की कमी के कारण कोई भी वंचित वर्ग न्याय से वंचित न रह जाए। इस पहल से विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति समुदायों को लाभ मिल रहा है।
विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा देशभर में निःशुल्क और सक्षम कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ओडिशा में यह व्यवस्था गांव और प्रखंड स्तर से लेकर ओडिशा उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक बहु-स्तरीय ढांचे के माध्यम से लागू की गई है।राज्य के जनजातीय बहुल और ग्रामीण इलाकों में ग्राम विधिक देखभाल एवं सहायता केंद्र, जिन्हें विधिक सेवा क्लीनिक भी कहा जाता है, स्थापित किए गए हैं।
नालसा (विधिक सेवा क्लीनिक) विनियम, 2011 के अनुसार ये केंद्र आबादी और स्थानीय जरूरतों के आधार पर एक गांव या गांवों के समूह को सेवाएं प्रदान करते हैं।वर्तमान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) और तालुक विधिक सेवा समितियों (टीएलएससी) की निगरानी में ओडिशा में कुल 132 ग्राम विधिक देखभाल एवं सहायता केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से लोगों को कानूनी समस्याओं के समाधान, सरकारी योजनाओं की जानकारी और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
आंकड़ों के अनुसार इन केंद्रों की पहुंच लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 में अधिकारियों ने 8,029 लोगों से संपर्क किया, जिनमें से 4,593 लोगों को कानूनी सहायता प्रदान की गई। वहीं 2025 में 7,638 लोगों तक पहुंच बनाई गई और 5,644 लोगों को प्रत्यक्ष विधिक सहायता मिली। इसके साथ ही ओडिशा में वैकल्पिक विवाद निपटान (एडीआर) व्यवस्था को भी सशक्त किया गया है।
वर्ष 2025 के दौरान नालसा की समय-सारणी के अनुरूप राज्य में चार राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन किया गया, जिनमें तालुक स्तर से लेकर ओडिशा उच्च न्यायालय तक के मामले शामिल रहे। इसके अलावा 27 जुलाई 2025 को जिला स्तर पर एक विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 से जुड़े मामलों पर विशेष फोकस रहा।राज्य में सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से संबंधित विवादों के निपटारे के लिए 22 स्थायी लोक अदालतें भी कार्यरत हैं।


