
माघ माह के शुक्ल पक्ष की अत्यंत पावन और विशेष तिथि त्रयोदशी के अवसर पर जसोलधाम स्थित विश्व विख्यात श्री राणी भटियाणी मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह से ही दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का मां जसोल के दर्शन के लिए आगमन शुरू हो गया, जो देर शाम तक पूरे उत्साह, संयम और अनुशासन के साथ जारी रहा। मंदिर परिसर और आसपास का पूरा क्षेत्र दिनभर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।
सुबह से लगी रहीं लंबी कतारें
सुबह से ही श्रद्धालु सुव्यवस्थित कतारों में खड़े होकर मां जसोल के दिव्य दर्शन के लिए प्रतीक्षा करते नजर आए। वृद्धजन, महिलाएं, युवा, बच्चे और नवविवाहित जोड़े विशेष भाव-भक्ति के साथ मां के चरणों में शीश नवाते दिखाई दिए। हर आयु वर्ग के श्रद्धालु अपने-अपने संकल्प और मनोकामनाओं के साथ मां जसोल के दरबार में उपस्थित रहे।
विशेष हवन का आयोजन
इस पावन अवसर पर श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान के अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल की ओर से समस्त भक्तों की सुख-समृद्धि, शांति और मनोकामना पूर्ति के संकल्प के साथ विशेष हवन का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और आहुतियों के साथ संपन्न हुए इस हवन में सामाजिक समरसता, विश्व कल्याण और जनकल्याण की मंगल कामनाएं की गईं। हवन स्थल पर श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष अनुभव किया गया।
कई देवालयों में हुआ विधिवत पूजन
त्रयोदशी के पावन दिन श्रद्धालुओं ने श्री राणीसा भटियाणीसा के साथ-साथ श्री बायोसा, श्री सवाई सिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी और श्री काला-गौरा भैरूजी के मंदिरों में विधिवत पूजा-अर्चना कर दर्शन लाभ प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने उत्तम स्वास्थ्य, पारिवारिक सुख, संतान प्राप्ति, सामाजिक कल्याण और जीवन में सकारात्मकता की प्रार्थनाएं कीं।
अनुशासन और व्यवस्था की दिखी मिसाल
पूरे दिन मंदिर परिसर में अनुशासन और व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध दर्शन किए, स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन किया और स्वच्छता बनाए रखने में पूरा सहयोग दिया, जिससे यह विशेष धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सका।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम
मंदिर संस्थान की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक प्रबंध किए गए थे। दर्शन पंक्तियों का सुव्यवस्थित संचालन, स्वच्छ पेयजल, छायादार विश्राम स्थल, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, नियमित साफ-सफाई, सूचना सहायता केंद्र, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों व दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सहयोग व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। प्रवेश और निकास द्वारों पर नियंत्रित व्यवस्था से भीड़ प्रबंधन को प्रभावी रूप से संचालित किया गया।
संध्याकालीन महाआरती का हुआ सीधा प्रसारण
माघ शुक्ल त्रयोदशी के अवसर पर संध्याकालीन महाआरती का सीधा प्रसारण भी किया गया, जिससे देश-विदेश में निवास कर रहे मां जसोल के भक्त अपने घरों से ही श्री राणी भटियाणीसा के दिव्य दर्शन और आरती का पुण्य लाभ प्राप्त कर सके। लाइव प्रसारण के दौरान मंदिर परिसर जयकारों, शंखनाद और भक्ति संगीत से गूंज उठा, जिससे वातावरण भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभूति से भर गया।
पुलिस प्रशासन ने संभाली सुरक्षा और यातायात व्यवस्था
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर जिला पुलिस अधीक्षक रमेश कुमार के निर्देशन में जसोल थाना प्रभारी शारदा विश्नोई, बालोतरा थाना प्रभारी हिंगलाज और उनकी पुलिस टीम ने सराहनीय सहयोग प्रदान किया। श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए यातायात संचालन, पार्किंग प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, प्रवेश-निकास मार्गों की सतत निगरानी और संवेदनशील स्थलों पर निरंतर पुलिस गश्त सुनिश्चित की गई, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित और निर्बाध आवागमन की सुविधा मिल सकी।
लोक और भक्ति संगीत से गूंज उठा परिसर
इस पावन अवसर पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित किया। हड़वा (बाड़मेर) से आए मांगणियार कलाकारों, पुष्कर से आए नगाराची कलाकारों और स्थानीय दमामी कलाकारों की लोक और भक्ति संगीत प्रस्तुतियों से पूरा परिसर लोक परंपरा और भक्ति रस में डूबा रहा।
इसी अवसर पर भोजन प्रसादी (अन्नपूर्णा प्रसादम) सेवा का पुण्य लाभ ग्राम मलवा (गिड़ा) निवासी श्रद्धालु अशोक सिंह, सुपुत्र बलवंत सिंह गोहिल ने लिया, जबकि छप्पन भोग सेवा का लाभ ग्राम कोडूका (पाटौदी) निवासी श्रद्धालु लक्ष्मण दान, सुपुत्र मंगल दान चारण ने प्राप्त किया। लाभार्थी परिवारों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर मां जसोल सहित समस्त देवालयों में श्रद्धापूर्वक भोग अर्पण किया।
इसके साथ ही परंपरानुसार कन्या पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें कन्याओं का विधिवत पूजन कर उन्हें भोजन प्रसाद और उपहार प्रदान किए गए। इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों का सुंदर संदेश भी दिया गया।
भोग अर्पण के पश्चात दर्शनार्थियों के बीच अन्नपूर्णा प्रसाद और छप्पन भोग का सुव्यवस्थित वितरण किया गया, जिससे हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए संस्थान द्वारा विकसित रिवर फ्रंट पार्किंग व्यवस्था भी विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध हो रही है। इस स्थायी और सुव्यवस्थित पार्किंग सुविधा से यातायात व्यवस्था सुचारू बनी हुई है, सड़क किनारे अव्यवस्थित वाहनों की समस्या में कमी आई है और श्रद्धालुओं को सुरक्षित व सुविधाजनक पार्किंग मिल रही है। इसी परिसर में निशुल्क भोजनशाला का संचालन भी किया गया, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।




