
अमेरिका का टैरिफ घटने से टेक्सटाइल नगरी पानीपत के उद्योगों को फिर से गति मिलेगी। अमेरिका ने भारत में बने उत्पादों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है जबकि पहले नौ प्रतिशत टैरिफ होता था। इससे उद्यमियों को फिर से व्यापार बढ़ने की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार के बजट में मेगा टेक्सटाइल पार्क और एमएसएमई के लिए नए प्रयास के दूसरे दिन ही उद्यमियों को यह बड़ी राहत मिली है।
पानीपत से अमेरिका में होता था 10 हजार करोड़ का निर्यात
पानीपत का करीब 20 हजार करोड़ रुपये का निर्यात और करीब 80 हजार करोड़ रुपये का घरेलू बाजार है। इसमें अकेले अमेरिका में करीब 10 हजार करोड़ का निर्यात होता था। यहां पहले टैरिफ नौ प्रतिशत लगता था। अमेरिका के राष्ट्रपति ने पहले टैरिफ 25 और फिर सीधे 50 प्रतिशत कर दिया था। टैरिफ की नई दर अक्तूबर महीने में लागू की गई थी। निर्यातकों व बायर्स ने शुरुआत रेट के लिए कई बार बात की लेकिन कोई रास्ता नहीं मिल पाया।
अमेरिका से 20 प्रतिशत रह गया था व्यापार
ऐसे में अमेरिका के बायर्स से टेक्सटाइल उत्पादों को लेना कम कर दिया था। उद्यमियों को उनकी शर्तों पर काम करना पड़ रहा था। अमेरिका के साथ पिछले ऑर्डर भी रद्द हो गए थे और नए ऑर्डर भी मिलना बंद हो गए थे। ऐसे में पानीपत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री का अमेरिका में व्यापार करीब 20 प्रतिशत रह गया था। वहीं, जर्मनी में 13 से 16 जनवरी तक अंतरराष्ट्रीय टेक्सटाइल मेला लगाया गया था। इसमें पिछली बार करीब चार हजार करोड़ के ऑर्डर मिले थे। इस बार करीब 1500 करोड़ के ऑर्डर मिले थे। इसका बड़ा कारण अमेरिका के बायर्स का पीछे हटना रहा था। ऐसे में निर्यातकों की चुनौती और बढ़ गई थी।
क्या बोले निर्यातक?
अमेरिका के साथ सबसे अधिक व्यापार था। 50 प्रतिशत टैरिफ के बाद ऑर्डर मिलने बंद हो गए थे। जर्मनी मेले में भी अपेक्षाकृत ऑर्डर नहीं मिले थे। इस समय बायर्स भी अपनी खरीदारी कर चुके हैं। अमेरिका के टैरिफ कम करने से खरीदार आना शुरू होंगे। -विनोद धमीजा, प्रधान, हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत चैप्टर।
अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी मंडी है। पानीपत के टेक्सटाइल उत्पादों की मांग भी अधिक रहती है। अमेरिका के टैरिफ कम करने से व्यापार फिर से तेज होगा। उद्यमी सीधे तौर पर अपने उत्पाद भेज सकेंगे। यह बड़ी राहत है। -रमेश वर्मा, प्रधान, हैंडलूम एक्सपोर्टर मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन।




