
चाऊके आदर्श स्कूल संघर्ष से जुड़े किसान नेताओं की रिहाई की मांग को लेकर आज से बठिंडा डीसी कार्यालय के बाहर ‘पक्का मोर्चा’ प्रस्तावित था। इससे पहले ही माहौल तनावपूर्ण हो गया है। प्रशासन और किसान संगठनों के बीच टकराव की स्थिति तब पैदा हुई जब पुलिस ने आधी रात के बाद पंजाब के विभिन्न गांवों में किसान नेताओं के घरों पर छापेमारी शुरू कर दी।
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां के घर भी छापामारी की गई लेकिन उगराहां नहीं मिले।
भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के अनुसार, पुलिस ने घराचों, महलां, गंडुआं और उगराहां सहित दर्जनों गांवों में दबिश दी। यूनियन ने सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई की सीसीटीवी फुटेज साझा करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश कर रहा है।
अजैब सिंह जखेपल और कर्मजीत सिंह मंगवाल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। यूनियन द्वारा पहले ही अलर्ट जारी होने के कारण कई दिग्गज नेता पुलिस को चकमा देकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने में सफल रहे।
क्या है विवाद की जड़
किसान नेताओं ने बैठक के दौरान बताया कि यह पूरा संघर्ष बलदेव सिंह चाऊके और सगनदीप सिंह जिऊद की रिहाई को लेकर है। दोनों नेता पिछले 9 महीनों से बठिंडा जेल में बंद हैं।
यूनियन का आरोप है कि पुलिस ने उन पर झूठे मुकदमे दर्ज किए हैं। जेल में रहने के दौरान सगनदीप सिंह की माता का देहांत हो गया था। तब भारी विरोध के बाद उन्हें मात्र अंतिम संस्कार के लिए पैरोल मिली थी।
जब तक रिहाई नहीं, तब तक घर वापसी नहीं
बीकेयू एकता उगराहां ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस की ये गिरफ्तारियां उनके इरादों को डिगा नहीं पाएंगी। आज से डीसी कार्यालय बठिंडा के बाहर शुरू होने वाला अनिश्चितकालीन पक्का मोर्चा हर हाल में लगाया जाएगा। नेताओं का कहना है कि प्रशासन ने बातचीत के बजाय दमन का रास्ता चुना है, जिसका जवाब एकजुटता से दिया जाएगा।




