
चिड़ौद गांव में कैंसर बीमारी के मरीज बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दस सालों में 50 के करीब ग्रामीण कैंसर बीमारी से ग्रस्त होकर मौत का ग्रास बन चुके हैं। अब भी 15 के करीब मरीज कैंसर की दवा ले रहे हैं। ग्रामीण दावा कर रहे हैं कि भूमिगत पीने का पानी पीने से कैंसर जैसी बीमारी का शिकार हो रहे हैं।
इस समस्या को लेकर वे कई बार जिला उपायुक्त और संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों का कहना है कि यहीं पानी सप्लाई होता रहा तो आने वाले समय में हर घर में कैंसर का एक मरीज होगा।
चिड़ौद गांव के रहने वाले सतबीर, मांगेराम, भूप सिंह, संजय और रमेश ने बताया कि गांव में कैंसर बीमारी तेजी से फैल रही हैं। गांव में हर छठे महीने में कैंसर से ग्रस्त एक मरीज की मौत हो रही हैं। गांव की आबादी चार हजार के करीब हैं। उन्होंने बताया कि अब भी 15 के करीब ग्रामीण कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं।
निहाल सिंह और महीपाल के परिवार में कैंसर से ग्रस्त है। जिनकी दवाइयां चल रही है। इसके अलावा कई और ऐसे परिवार है जिनकी दवाइयां चल रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अधिकतर रोगियों में गले व फेफड़े का कैंसर मिला है। यहां पर पानी का टीडीएस 1500 से 2000 के करीब टीडीएस पानी में मिलता है।
सुभाष ने कहा-दिसंबर में कैंसर से हुई थी भाई की मौत
चिड़ौद गांव के रहने वाले सुभाष ने बताया कि दिसंबर 2025 में भाई पटेल सिंह की कैंसर बीमारी के कारण मौत हुई थी। उन्होंने बताया कि गांव में कैंसर की बीमारी तेजी से फैलती जा रही हैं। गांव का ऐसा कोई हिस्सा नहीं है जहां पर कैंसर का मरीज न हो। अभी तक 50 से अधिक लोगों की कैंसर की बीमारी से मौत हो चुकी हैं। गांव वालों का मानना है कि पीने के पानी के कारण यह बीमारी फैल रही हैं।
ग्रामीण बोले- भूमिगत खारा जल पीने के लायक नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि महीने में 15 दिन नहर में पानी आता है। उस समय जलघर में नहर का पानी छोड़ा जाता है। उससे कुछ दिन सप्लाई होती है, उसके बाद जलघर के अंदर लगे ट्यूवैल से सप्लाई होती है। भूमिगत पानी खारा है जो कि पीने लायक नहीं है।
इस पानी के अलावा ग्रामीणों के पास और कोई विकल्प नहीं है। हालांकि गांव में एक दो नलकूप लगे हुए है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जलघर में नहर का पानी छोड़ा जाता है तो दो दिन में एक बार पीने के पानी की सप्लाई होती है। उनका कहना है कि पानी की जांच करवाई जा चुकी है, पानी पीने के लायक नहीं है।
हवा में प्रदूषण, पानी में प्रदूषण और अत्यधिक फसलों पर कीटनाशक और यूरिया का छिड़काव कैंसर की बीमारी को तेजी से बढ़ा रहा है। फसलों पर रसायनिक तत्वों का इस्तेमाल करने से भूमिगत पानी पर असर पड़ रहा है और उसी पानी को पीने से लोग कैंसर की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। -डॉ. लवनिश गोयल, कैंसर स्पेशलिस्ट, हिसार
गांव में स्वच्छ पेयजल की सप्लाई हो रही है। पानी के कारण कैंसर की बीमारी नहीं फैल रही। -मोलू राम, सरपंच प्रतिनिधि, गांव चिड़ौद




