
प्रखंड अंतर्गत टिनगीना गांव के किसान राजेंद्र काशी ने खेती के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर जिले और राज्य का नाम रोशन किया है।
राजेंद्र काशी ने एक ही हल्दी के पौधे से लगभग 15 किलोग्राम हल्दी उत्पादन कर एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। उनकी इस उपलब्धि से ना केवल क्षेत्र के किसान उत्साहित हैं, बल्कि यह सफलता पूरे राज्य के लिए गौरव का विषय बन गई है।
करीब एक वर्ष तक निरंतर परिश्रम, धैर्य और नवीन प्रयोगों के बाद तैयार की गई इस विशेष हल्दी ने हाल ही में सिमडेगा में आयोजित कृषि विकास मेला सह उद्यान प्रदर्शनी में सबका ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनी के दौरान उनकी हल्दी को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
किसान के नाम पर रखा गया किस्म का नाम
वहीं, किसान राजेंद्र काशी को कुल 11 अलग-अलग पुरस्कार प्रदान किए गए। उनकी इस सफलता की चर्चा अब जिलेभर में हो रही है। यहां तक कि विकसित की गई हल्दी की नई किस्म का नाम ‘राजेंद्र’ रखा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस किस्म के उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों ही अत्यंत उत्कृष्ट हैं। माना जा रहा है कि यह किस्म भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है और हल्दी उत्पादन के क्षेत्र में नई क्रांति ला सकती है।
इस रिकॉर्ड को स्थापित करने में जलडेगा के युवा किसान सोनू सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने पूरे एक वर्ष तक इस प्रयोग में सक्रिय सहयोग दिया।
प्राकृतिक खेती से किया कमाल
सोनू सिंह ने बताया कि यह असाधारण उत्पादन पूरी तरह प्राकृतिक खेती पद्धति से संभव हुआ है। इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया गया।
जीवामृत, कंपोस्ट खाद और लाभकारी सूक्ष्मजीवों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई गई, जिससे पौधे का विकास बेहतर हुआ और उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।
राजेंद्र काशी की यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि आधुनिक सोच, वैज्ञानिक पद्धति और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग से खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि जिले में प्राकृतिक खेती को नई दिशा देगी और आने वाले समय में अधिक किसान इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।




