उड़ीसाराज्य

ओडिशा के कोरापुट में अंधेरे के साये में डूबे सैकड़ों गांव, ढिबरी की रोशनी में पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे

हां एक ओर अपरकोलाब और माछकुंड जल विद्युत परियोजनाएं पूरे ओडिशा को रोशन कर रही हैं, वहीं इन्हीं परियोजनाओं के साये में बसे सैकड़ों गांव आज भी अंधेरे में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।जयपुर ब्लॉक के टांकुआ पंचायत अंतर्गत पहाड़ी पर बसे बेडागुड़ा गांव की स्थिति इस विडंबना की बानगी है।

गांव के ऊपर से उच्च क्षमता वाली विद्युत लाइन गुजरती है और मात्र सात किलोमीटर की दूरी पर अपरकोलाब जल विद्युत परियोजना स्थित है, लेकिन गांव के 20 परिवारों के घरों में आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है।वर्षों से मांग के बावजूद यहां बिजली कनेक्शन महज सपना बनकर रह गया है। पहले लगाए गए चार सोलर लाइट भी अब खराब हो चुके हैं, जिससे शाम ढलते ही गांव अंधेरे में डूब जाता है।

ढिबरी की रोशनी में पढ़ाई, चूल्हे की आग में गुजरती जिंदगी
बेडागुड़ा ही नहीं, कोरापुट जिले के 200 से अधिक मुहल्ले और गांवों में बिजली का संकट बना हुआ है। बिजली नहीं होने के कारण ग्रामीण ढिबरी और चूल्हे की आग के सहारे जीवन काट रहे हैं।कई गांवों में लोग खुले में आग जलाकर रात का भोजन करते हैं, जबकि बच्चों की पढ़ाई ढिबरी की मंद रोशनी में हो रही है।

कोरापुट शहर से महज एक किलोमीटर दूर स्थित गुली फायर बस्ती की स्थिति भी अलग नहीं है। गौतम नगर से विस्थापित होकर आए 19 परिवार पिछले दस वर्षों से यहां रह रहे हैं, लेकिन न बिजली मिली है, न पेयजल और न ही अन्य बुनियादी सुविधाएं।

सरकारी सूची में नहीं कई अंधेरे गांव
हैरानी की बात यह है कि बिजली संकट झेल रहे कई गांवों का नाम सरकार की बिना बिजली वाले गांवों की सूची में ही दर्ज नहीं है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार कोरापुट जिले के 169 मुहल्ले और गांवों में अब तक बिजली कनेक्शन नहीं हुआ है।

रिकॉर्ड के मुताबिक बंधुगांव के 10, बैपारिगुड़ा के 24, बोरिगुम्मा के 7, दशमंतपुर के 11, जयपुर के 11, कोरापुट के 7, कोटपाड़ के 17, कुंदुरा के 19, लमतापुट के 5, लक्ष्मीपुर के 2, नंदपुर के 7, नारायणपटना के 23, पट्टांगी के 15 और सेमिलिगुड़ा के 3 गांव आज भी बिजली से वंचित हैं। जबकि जमीनी हकीकत में यह संख्या 200 से अधिक बताई जा रही है।

सोलर भी बेअसर, स्थायी समाधान की मांग
जिले की भौगोलिक स्थिति और जलवायु के कारण वर्ष में करीब छह महीने बादल छाए रहते हैं, जिससे सोलर लाइट व्यवस्था भी प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है। ऐसे में ग्रामीणों और विद्युत समिति के सदस्यों ने सरकार से इन गांवों में शीघ्र स्थायी बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि जब उनके ऊपर से बिजली गुजर रही है, तो उन्हें अंधेरे में रहने को मजबूर करना सरासर अन्याय है।

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