दिल्लीराज्य

एम्स में एडवांस डायलिसिस सुविधा: एसएलईडी मशीन खरीद प्रक्रिया तेज

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एडवांस मशीन से मरीजों का डायलिसिस किया जाएगा। इसको लेकर सस्टेंड लो-एफिशिएंसी डायलिसिस (एसएलईडी) मशीन खरीदने की प्रक्रिया तेज हो गई। जिसकी मदद से गंभीर मरीजों का आसानी से डायलिसिस किया जा सकेगा।

मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एम्स ने यह कदम उठाया है। इस संबंध में एक एडवांस डायलिसिस मशीन की खरीद को लेकर एम्स ने निविदा भी जारी कर दी है। एडवांस डायलिसिस मशीन गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए एक आधुनिक तकनीक हैं। यह पारंपरिक हेमोडायलिसिस और निरंतर उपचार (सीआरआरटी) का एक हाइब्रिड रूप है। एसएलईडी एक हाइब्रिड थेरेपी है जिसमें धीमी रफ्तार से खून को साफ किया जाता है।

बोन ग्राफ्ट की भी होगी खरीद
एम्स ने ट्राॅमा सेंटर के लिए बोन ग्राफ्ट की खरीद का भी निर्णय लिया है। बोन ग्राफ्ट के लिए 232 आइटम की खरीद की जाएगी। इस संबंध में एम्स ने निविदा जारी की है। बोन ग्राफ्ट का इस्तेमाल हड्डी को जोड़ने के लिए किया जाता है। साथ ही डेंटल इंप्लांट और स्पाइन फ्लूयजन के लिए बोन ग्रॉफ्टिंग की जाती है।

अचानक नहीं गिरेगा ब्लड प्रेशर
आईसीयू में उपचार के लिए भर्ती मरीजों के लिए यह मशीन काफी फायदेमंद है। किडनी फंक्शन को धीरे-धीरे बहाल करने की एक अपग्रेड, सुरक्षित और किफायती विधि है। छह से 12 घंटे की अवधि में मरीज का धीमी गति से डायलिसिस किया जाता है। एसएलईडी सुविधा के होने से मरीज का ब्लड प्रेशर एकदम नहीं गिरता है। हृदय की स्थिति अस्थिर होने पर भी मरीज के डायलिसिस के लिए यह सुरक्षित है। इसके अलावा यह मशीन उन मरीजों के लिए भी फायदेमंद जिनके कई अंग काम नहीं करते और गंभीर संक्रमण की समस्या से जूझ रहे होते हैं।

Related Articles

Back to top button