अन्तर्राष्ट्रीय

न कफन मिला-न कंकाल, बस दीवारों पर रह गई राख: गाजा में कैसे ‘गायब’ हो रहे हैं लोग?

10 अगस्त, 2024 .. गाजा सिटी का अल-ताबिन स्कूल उस दिन सुलगता खंडहर बन चुका था। दीवारें काली पड़ चुकी थीं, खिड़कियां उखड़ चुकी थीं और हवा में बारूद और जले हुए मलबे की गंध तैर रही थी। इसी खंडहर में यास्मीन महानी अपने बेटे साद को ढूंढ रही थीं। चहुंओर अफरा-तफरी का माहौल था। कोई नाम पुकार रहा था तो कोई धुएं को चीरते हुए अपनों को खोज रहा था।

यास्मीन को अचानक अपने पति की चीख सुनाई दी। वह उस आवाज की तरफ दौड़ीं, लेकिन साद… उसका कुछ पता नहीं चला। यास्‍मीन कलेजे के टुकड़े की तलाश में स्‍कूल से मस्जिद पहुंची, जहां लगा पैर रखते ही लगा जैसे- मांस और खून पर पांव रख दिया हो, झटके से पैर पीछे खींच लिया। उस पल यास्‍मीन सहम गई, वह समझ चुकी थी कि यह सिर्फ इमारतों का नहीं, जिस्मों का भी मलबा है।

उस दिन के बाद से यास्मीन कई दिनों तक अस्पतालों के चक्कर लगाती रहीं। हर वार्ड में झांकतीं, हर स्ट्रेचर पर पड़े चेहरे को गौर से देखतीं। फिर मुर्दाघरों की ओर जातीं कि शायद वहां कोई सुराग मिल जाए, लेकिन न बेटा साद मिला, न उसके जिंदा होने का सबूत और न मौत की पुष्टि।

कैसे मान लूं- बेटा नहीं रहा?

यास्‍मीन कहती है, ‘दफनाने के लिए शरीर का न कोई हिस्सा मिला और न पहचान के लिए कोई सबूत, अब तुम्‍हीं बताओ- मैं कैसे मान लूं कि बेटा नहीं रहा, यह मानना मेरे लिए नहीं, किसी के लिए भी बहुत मुश्किल पल था।’

यास्मीन महानी उन हजारों फिलिस्तीनियों में से एक हैं, जिनके अपने गाजा पर किए गए इजरायली हमले के बाद से लापता हैं। इनके अपने मुर्दाघरों व खंडहरों में ढूंढ रहे हैं। इजरायल और गाजा की जंग में अब तक 72,000 लोग मारे जा चुके हैं, लेकिन कुछ कहानियां मौत के आंकड़ों से भी आगे की हैं।

कहां लापता हो गए लोग, क्‍या भाप बनकर उड़ गए?

अल जजीरा अरबी की पड़ताल रिपोर्ट  ‘द रेस्ट ऑफ द स्‍टोरी’ में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में जंग शुरू होने के बाद से गाजा की सिविल डिफेंस टीमों ने आधिकारिक तौर पर 2,842 ऐसे मामलों को दर्ज किया है, जहां लोगों की मौत तो मानी गई, लेकिन दफनाने के लिए शव तो दूर – न खून के छींटे, न मांस के लोथड़े, न कपड़े और न कंकाल मिले।

ये लोग पूरी तरह गायब हो गए, जैसे भाप बनकर उड़ गए हों। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह आंकड़ा कही-सुनी बातों के आधार पर नहीं, फोरेंसिक जांच और घटनास्थल से जुटाए गए डेटा पर आधारित हैं। इन 2,842 के अलावा भी 3,500 से ज्यादा लोग लापता हैं।

लोगों के गायब होने पर क्‍या बोले एक्सपर्ट?

सैन्‍य एक्‍सपर्ट और चश्मदीदों का कहना है,  ये 2,842 लोग इसलिए गायब हुए हैं, क्‍योंकि इजरायल ने गाजा सिटी में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत प्रतिबंधित ‘वैक्यूम बमों’ का इस्तेमाल भी किया था। ये ‘थर्मल’ और ‘थर्मोबेरिक’ (thermobaric) हथियार फटने पर 3,500 डिग्री सेल्सियस (करीब 6,332°F) तक का तापमान पैदा करते हैं कि इंसानी शरीर झुलसकर राख हो जाए।

वैक्यूम बम क्‍या होते है?

रूसी सैन्य विशेषज्ञ वासिली फातिगारोव ने बताया कि वैक्यूम बम पहले ईंधन का एक बादल (एयरोसोल) फैलाते हैं और फिर उसमें आग लगा देते हैं। इससे एक विशाल आग का गोला और वैक्यूम (शून्य) पैदा होता है। बमों में एल्यूमीनियम और मैग्नीशियम होता है, जो कुछ ही पलों में इंसान को राख और धुएं में बदल देते हैं। दीवारों पर खून के छींटे ही अंतिम प्रमाण बचते हैं।

इमारत को नुकसान नहीं, लेकिन अंदर सब राख; कैसे?

एमके-84 ‘हमर’ –  यह 900 किलो का बम होता है, जिसमें ट्राइटोनल का यूज होता है। इसके फटने पर 3,500 डिग्री तापमान पैदा होता है। यह बम धमाके के बाद दबाव तरंग (प्रेशर वेव) से फेफड़ों को फाड़ देता है और तेज ताप तरंग यानी थर्मल वेव से शरीर के मुलायम ऊतकों को जला देता है।

बीएलयू-109 बंकर बस्टर – इसमें मजबूत स्टील का खोल और डिले (विलंबित) फ्यूज होता है, जो जमीन या संरचना में धंसने के बाद पीबीएक्सएन-109 विस्फोटक मिश्रण के साथ फटता है। इससे बंद जगहों के भीतर बड़ा आग का गोला बनता है, जो हर चीज को जलाकर राख कर देता है।

जीबीयू-39 – यह एक सटीक निशाना लगाने वाला ग्लाइड बम है, जिसमें एएफएक्स-757 विस्फोटक होता है। गाजा सिटी के अल-तबिन स्कूल पर हमले में इसका इस्तेमाल हुआ। गाजा सिविल डिफेंस की टीम ने हमले के बाद कई जगहों से जीबीयू-39 के टुकड़े बरामद किए हैं, जहां से लोग गायब हुए। इन हथियारों को एयरोसोल बम भी कहते हैं।

गाजा में अभी कैसे हैं हालात?

गाजा में वर्तमान में एक औपचारिक शांति समझौता (सीजफायर) लागू है। समझौते को 100 दिन पूरे हो चुके हैं और समझौता दूसरे चरण में पहुंच चुका है। हालांकि, माहौल में अभी तनाव बना हुआ है। समझौता लागू होने के बाद से अब तक 500 से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं।

Related Articles

Back to top button