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छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के शवों को कब्र से निकालने पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को छत्तीसगढ़ सरकार से एक याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राज्य के गांवों में आदिवासी ईसाइयों के शवों को जबरन कब्र से निकाला गया और फिर दफनाया गया। शीर्ष अदालत ने आगे से कोई शव कब्र से निकालने पर रोक भी लगा दी है।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें दावा किया गया है कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों को अपने परिवार के मृतक सदस्यों को उनके गांवों में दफनाने से जबरन रोका गया।

वकील सत्य मित्रा के माध्यम से यह याचिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन फॉर जस्टिस एंड इक्वलिटी और अन्य की तरफ से दाखिल की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कालिन गोंसाल्विस ने कहा कि याचिकाकर्ताओं में से एक की मां का शव कब्र से निकाला गया और जानकारी दिए बिना कहीं और दफना दिया गया। एक अन्य याचिकाकर्ता के पति का शव भी बहुसंख्यक समुदाय के लोगों द्वारा कब्र से जबरन निकाला गया और दूर एक स्थान पर दफना दिया गया।

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