
केंद्र सरकार ने ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर ग्रीन हाइड्रोजन और अमोनिया के लिए समर्पित टर्मिनल के निर्माण को मंजूरी दे दी है।
इस परियोजना पर 797.17 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसे पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने स्वीकृति दी है। यह परियोजना देश की स्वच्छ ऊर्जा और हरित लॉजिस्टिक्स को मजबूती देगी।
ग्रीन हाइड्रोजन टर्मिनल का निर्माण और संचालन पारादीप पोर्ट अथारिटी द्वारा बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल के तहत किया जाएगा।टर्मिनल की सालाना क्षमता 4 मिलियन टन होगी। यह परियोजना नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा मानी जा रही है।
अत्याधुनिक जेट्टी और सुरक्षा व्यवस्था
परियोजना के तहत एक समर्पित जेटी बनाई जाएगी, जहां ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया और अन्य तरल कार्गो का संचालन किया जाएगा। इसमें भंडारण टैंक, पाइपलाइन, आधुनिक कार्गो हैंडलिंग सिस्टम और आवश्यक सहायक सुविधाएं शामिल होंगी।
जेटी पर बर्थ की ड्रेज गहराई 14.3 मीटर होगी, जबकि दोनों छोर के डॉल्फ़िन्स के बीच 279 मीटर का अंतर रखा जाएगा, जिससे बड़े तरल कार्गो जहाजों की सुरक्षित बर्थिंग संभव हो सकेगी।
24 महीनों में पूरा होगा निर्माण
परियोजना के समय पर क्रियान्वयन के लिए पारादीप पोर्ट प्राधिकरण कुल लागत का 20 प्रतिशत, यानी लगभग 159.43 करोड़ रुपये, पूंजी सहायता के रूप में देगा। इस टर्मिनल के 24 महीनों में तैयार होने की उम्मीद है।
निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनवाल ने कहा कि यह परियोजना भारतीय बंदरगाहों को सतत विकास का केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक समुद्री अवसंरचना के विकास पर जोर दिया।
अधिकारियों के अनुसार, यह टर्मिनल ओडिशा में विकसित हो रहे ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन केंद्रों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
इससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पूर्वी भारत में सहायक उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा।ग्रीन हाइड्रोजन और अमोनिया के साथ-साथ यह टर्मिनल अन्य तरल कार्गो को भी संभाल सकेगा, जिससे शुरुआती चरण में परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग संभव होगा।



