
दिल्ली सरकार ग्रीन बजट की तैयारी में जुटी है। इसका मकसद है कि बजट का एक बड़ा हिस्सा पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण कम करने, साफ ऊर्जा और पानी बचाने जैसी योजनाओं पर लगे, ताकि विकास और हरियाली साथ-साथ चल सकें।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ग्रीन बजट में साफ तौर पर दिखेगा कि सरकार पर्यावरण से जुड़े कामों पर कितना खर्च कर रही है और उसके नतीजे क्या आ रहे हैं। इससे बजट में पारदर्शिता आएगी और पैसा सही जगह लगेगा। कई देशों और भारत के कुछ राज्यों ने पहले से ही ग्रीन बजट या क्लाइमेट बजट शुरू कर दिए हैं। दिल्ली सरकार भी इन मॉडलों को देख रही है और राजधानी के लिए सबसे सही तरीका तलाश रही है।
ग्रीन बजट पर निवेश बढ़ेगा
यह बजट सिर्फ पर्यावरण बचाने तक नहीं रुकेगा। इससे अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा। स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, कचरा प्रबंधन, पानी बचत और हरी इमारतों जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा। नई तकनीकें आएंगी और खासकर युवाओं के लिए रोजगार के ढेर सारे मौके पैदा होंगे। मतलब, पर्यावरण बचाओ और कमाओ भी, दोनों काम एक साथ होंगे। दिल्ली सरकार ने पहले से इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।
विशेषज्ञों से सलाह
सरकार अब विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों, नीति बनाने वालों और अलग-अलग विभागों से बात कर रही है। सबकी राय लेकर ग्रीन बजट को जमीन पर उतारा जाएगा। मकसद साफ है दिल्ली में हर नया प्रोजेक्ट पर्यावरण के हिसाब से हो, ताकि आने वाली पीढ़ियां साफ हवा, साफ पानी और हरा-भरा शहर पाएं।
विकास का नया रोल मॉडल बनेगा
दिल्ली को साफ, हरा और टिकाऊ शहर बनाने में ग्रीन बजट बड़ा रोल निभा सकता है। यह न सिर्फ प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करेगा, बल्कि राजधानी को पूरे देश के लिए हरित विकास का मॉडल भी बन सकता है।




