ट्रंप खूब चिल्लाते हैं ‘अमेरिका फर्स्ट’, लेकिन हर अमेरिकी परिवार पर ₹97 लाख का कर्ज

अमेरिका, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहां इसकी मजबूती और चुनौतियाँ दोनों ही साफ दिखाई देती हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “अमेरिका फर्स्ट” के नारे ने देश की आर्थिक नीतियों को आकार दिया, मगर एक सवाल जो अक्सर पूछा जाता है – क्या अमेरिका वास्तव में अपने नागरिकों के लिए पहले स्थान पर है? अमेरिकी लोगों पर भारी कर्ज का बोझ एक ऐसी ही चुनौती है जो देश की आर्थिक सेहत पर सवाल खड़े करती है। क्या ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति अमेरिकीयों के लिए वास्तव में फायदेमंद है, या यह सिर्फ एक राजनीतिक नारा बनकर रह गया है? आइए जानते हैं कि अमेरिकी नागरिकों पर कितना कर्ज है।
रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचा कुल कंज्यूमर कर्ज
फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के डेटा के अनुसार, साल 2025 के आखिर तक अमेरिका में कुल कंज्यूमर कर्ज रिकॉर्ड $18.8 ट्रिलियन (1735.3 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया। इसमें क्रेडिट कार्ड बिल, ऑटो लोन और मॉर्गेज सहित सभी तरह के कर्ज शामिल हैं।
हर परिवार पर कितना कर्ज?
कुल कंज्यूमर कर्ज $18.8 ट्रिलियन पर पहुंचने का मतलब है कि हर अमेरिकी परिवार पर औसतन कर्ज $105,056 (करीब 97 लाख रुपये) है। औसत कर्ज बैलेंस में कुछ भी बदलाव नहीं हुआ। अमेरिकी कंज्यूमर्स का औसत कर्ज बैलेंस 2025 की चौथी तिमाही में $105,056 रहा, जो कि 2024 की चौथी तिमाही में भी इतना ही रहा था।
जनरेशन के आधार पर आया है बदलाव
जनरेशन के हिसाब से, अमेरिका में कर्ज की एक अलग कहानी है। Gen X (1965-80 तक जन्मे लोग) पर सबसे ज्यादा एवरेज कर्ज रहा, लेकिन ये 2024 से यह थोड़ा कम हुआ, क्योंकि अधिक लोगों ने मॉर्गेज चुका दिए और अपने बच्चों की कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर ली।
साल-दर-साल सबसे ज्यादा कर्ज में बढ़ोतरी Gen Z के मेंबर्स में हुई, जो कॉलेज से ग्रेजुएट हो रहे हैं और घर खरीदने वाले सालों में कदम रख रहे हैं।
ऑटो डेट किस पर अधिक
महंगी, ज्यादा भरोसेमंद गाड़ियों और एक घर में कई गाड़ियों की जरूरत की वजह से, Gen X और मिलेनियल्स पर सबसे अधिक एवरेज ऑटो डेट है। Gen X का एवरेज मंथली पेमेंट सबसे ज़्यादा $594 है, उसके बाद मिलेनियल्स का $589 है।
Gen Z पर कर्ज का बोझ कम है, लेकिन अपनी कम इनकम और लिमिटेड क्रेडिट हिस्ट्री की वजह से सबसे ज्यादा इंटरेस्ट रेट का सामना इसी कैटेगरी के लोगों को करना पड़ रहा है।




