बॉडी बनाने की चाहत कहीं छीन न ले आपकी रातों की नींद

आज के समय में युवाओं के बीच फिटनेस और जिम को लेकर एक गजब का क्रेज देखने को मिल रहा है, लेकिन, बेहतरीन शरीर और कसरत के दौरान ज्यादा ताकत पाने की चाहत में अपनाया जा रहा एक लोकप्रिय चलन धीरे-धीरे उनकी रातों की नींद खराब कर रहा है। यह चलन है- एक्सरसाइज करने से ठीक पहले ‘प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स’ लेना।
प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स पर नई मेडिकल रिपोर्ट
हाल ही में टोरंटो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में इस खतरे को लेकर चेतावनी दी गई है। ‘कैनेडियन स्टडी ऑफ एडोलसेंट बिहेवियर्स’ के आंकड़ों पर आधारित यह शोध बताता है कि जो किशोर और युवा इन सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करते हैं, उनमें नींद से जुड़ी समस्याएं पैदा होना शुरू हो जाती हैं। ऊर्जा बढ़ाने वाले इन फिटनेस उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता अपने साथ स्वास्थ्य से जुड़े कई संभावित जोखिम लेकर आ रही है।
16-30 साल के युवाओं के लिए चेतावनी
अगर अध्ययन के आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति साफ हो जाती है। शोध में 16 से 30 वर्ष की उम्र के युवाओं को शामिल किया गया था। इसमें पाया गया कि जिन युवाओं ने पिछले एक साल के भीतर प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स का सेवन किया था, उनमें रात के समय केवल पांच घंटे या उससे भी कम सोने की संभावना उन लोगों की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा थी, जो इन उत्पादों का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
साइंस डेली के अनुसार, बाजार में बैंग, जैक3डी और सी4 जैसे प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इन उत्पादों को आमतौर पर शरीर की ऊर्जा का स्तर बढ़ाने और कसरत के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने के दावे के साथ बेचा जाता है।
कैफीन का ओवरडोज पड़ रहा भारी
इस अहम अध्ययन के प्रमुख लेखक और टोरंटो विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर काइल टी गैन्सन ने इस समस्या के मुख्य कारण के बारे में भी बताया है। उनके अनुसार, इन प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स में कैफीन और उत्तेजक तत्वों की मात्रा बहुत अधिक होती है। कसरत के वक्त तुरंत और बेहतर ऊर्जा पाने की चाह रखने वाले किशोरों और युवाओं के बीच यह तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जिसका सीधा और नकारात्मक असर उनकी नींद पर पड़ रहा है।




