इन वजहों से रातभर बदलते हैं आप करवटें…

लॉजिक कहता है कि दिनभर की थकान के बाद शरीर को रात में गहरी नींद आनी चाहिए, जबकि कुछ लोगों के मामले में यह लॉजिक फेल हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो रातभर करवटें बदलते रहते हैं पर नींद आती ही नहीं। पर कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? चलिए नींद न आने के कारणों के बारे में डिटेल में बात करते हैं।
थकान के बावजूद नींद न आने के कारण
रात में नींद न आने के बहुत से कारण होते हैं, आइए इनके बारे में जानते हैं:
इंसोम्निया
जब शरीर पूरी तरह से थकने के बाद भी रात में सो नहीं पाता तो इसे अक्सर इंसोम्निया कहा जाता है। इंसोम्निया एक तरह का स्लीप डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति को सोने में परेशानी होने के साथ ही गंभीर मामलों में रातभर नींद तक नहीं आती।
तनाव और एंग्जाइटी
सोते समय दिमाग में विचार आते रहना, किसी बात को लेकर लंबे समय से चिंता और एंग्जाइटी जैसी समस्याएं स्लीप साइकल बिगाड़ देती हैं।
थायरॉइड
अगर आपका थायरॉइड लेवल बैलेंस नहीं है तो यह नींद न आने का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अकेले नींद न आने की दिक्कत को थायरॉइड डिसऑर्डर से नहीं जोड़ा जा सकता है।
मेनोपॉज
महिलाओं को नींद न आने की एक वजह मेनोपॉज भी है, क्योंकि इस दौरान शरीर में कई तरह के हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। इसके साथ अगर हॉट फ्लैश और पसीना बहुत आ रहा है तो इस संकेत को अनदेखा न करें।
दवाइयां
ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन और एंग्जाइटी से बचने के लिए ली जा रही दवाइयां भी स्लीप साइकल बिगाड़ती हैं। इस बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।
बेहतर नींद के लिए टिप्स
सोते समय कमरे में पर्याप्त अंधेरा होने के साथ हल्की ठंडक भी होनी चाहिए। वहीं, नींद के लिए शांति कितनी जरूरी है यह तो आप जानते ही हैं।
सोने का एक समय तय करें ताकि बॉडी क्लॉक उसी तरह से खुद को ढाल पाए।
कैफीन, शराब, निकोटीन के सेवन और सोने के समय के बीच कम से कम 4-6 घंटे का गैप रखें।
ज्यादा स्क्रीन टाइम भी स्लीप साइकल खराब करता है, सोने से 1 घंटे पहले ही मोबाइल और लैपटॉप अलग रख दें।



