
हरियाणा सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना (दयालु योजना) में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं।
नई अधिसूचना के तहत अब दुर्घटना में मृत्यु या 70 प्रतिशत से अधिक स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता के लिए 180 दिन (छह माह) तक दावा किया जा सकेगा। पहले यह समय-सीमा 90 दिन (तीन माह) थी। सरकार ने पुराने मामलों को भी राहत देते हुए छह माह तक दावा प्रस्तुत करने की अनुमति दी है।
देरी से प्राप्त दावों के निस्तारण के लिए भी पहली बार स्पष्ट व्यवस्था लागू की गई है। छह से सात माह की देरी वाले मामलों का निर्णय हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास (एचपीएसएन) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी करेंगे। सात से नौ माह की देरी वाले मामलों पर वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, जबकि नौ से 12 माह की देरी वाले मामलों पर वित्त मंत्री निर्णय लेंगे।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र भी बनाया गया है। प्रत्येक जिले में उपायुक्त (डीसी) शिकायतों के निस्तारण के लिए जिम्मेदार होंगे, जबकि जिला सांख्यिकी अधिकारी (डीएसओ) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी पात्र व्यक्ति का दावा हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड या भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड से खारिज हो जाता है, लेकिन वह दयालु योजना की पात्रता पूरी करता है, तो उसे इस योजना के तहत आर्थिक सहायता का लाभ मिल सकेगा। हालांकि योजना की मूल पात्रता और सहायता राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह 1.80 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवार, जिनके पास परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) है, योजना के पात्र रहेंगे। आयु वर्ग के अनुसार लाभार्थियों को एक लाख रुपये से पांच लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलती रहेगी।





