राम मंदिर: CEO चयन में 34 सवालों की कसौटी, अंतिम फैसला ट्रस्ट का…

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन की प्रक्रिया में अभ्यर्थियों के लिए 34 बिंदुओं वाला विस्तृत मूल्यांकन प्रारूप तैयार किया गया था। तीन सदस्यीय चयन समिति (सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावड़े और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी) की ओर से लिए गए इंटरव्यू में भीड़ प्रबंधन, धार्मिक जुड़ाव, नेतृत्व क्षमता से जुड़े सवाल पर अधिक जोर रहा।
चयन समिति ने आवेदकों से कम से कम 20 वर्ष का अनुभव मांगा था। आवेदकों से सवाल पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने कार्यकाल में 1,000 से 5,000 या उससे अधिक कर्मचारियों का नेतृत्व किया है या नहीं। राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन और पर्वों पर लाखों की भीड़ को देखते हुए चयन प्रक्रिया में भीड़ प्रबंधन को महत्वपूर्ण मानदंड बनाया गया है। इंटरव्यू में पैनल के सदस्यों ने आवेदकों से पूछा कि उन्होंने अब तक कौन-कौन से बड़े आयोजनों का संचालन या प्रबंधन किया है, उन आयोजनों में कितने लोग शामिल हुए, आयोजन कितने दिनों तक चला, किस वर्ष आयोजित हुआ और उसमें उनकी भूमिका क्या रही। सामाजिक और धार्मिक अनुभव से जुड़े कई प्रश्न भी किए गए।
समिति को अंतिम 18 आवेदकों में से तीन सर्वश्रेष्ठ नामों का पैनल तैयार कर दो सितंबर से पहले ट्रस्ट को सौंपना है। दो सिंतबर को ट्रस्ट की बैठक में सीईओ का नाम घोषित किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार सीईओ की नियुक्ति में संघ के पदाधिकारियो की भी पंसद व राय देखी व जानी जाएगी। यह बात भी सामने आ रही है कि संघ की पृष्ठभूमि से जुड़ा कोई सेवानिवृत्त अधिकारी भी सीईओ हो सकता है।
अंतिम साक्षात्कार करेगा राम मंदिर ट्रस्ट
सीईओ पद के लिए आवेदन प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों से सामान्य प्रशासन, वित्त, मानव संसाधन, जनसंपर्क, सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और विधि-व्यवस्था में कम से कम 20 वर्ष के अनुभव की जानकारी मांगी गई थी। सीईओ चयन के लिए 18 अभ्यर्थियों में से तीन नामों का पैनल तैयार किया जाएगा, जिनका अंतिम इंटरव्यू श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट करेगा। ट्रस्ट की अंतिम स्वीकृति के बाद एक अभ्यर्थी को राम मंदिर का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। ट्रस्ट ने सीईओ पद के लिए 50 से 70 वर्ष आयु सीमा निर्धारित की है। नियुक्ति प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के लिए होगी, जिसे कार्य प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा।
महासचिव के पास ही रहेगी सर्वोच्च प्रशासनिक शक्ति
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का पद मंदिर के दैनिक प्रशासन और पेशेवर प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व संभालेगा, लेकिन उसकी कार्यप्रणाली पूरी तरह ट्रस्ट के अधीन होगी। सीईओ ट्रस्ट के प्रति जवाबदेह रहेगा और ट्रस्ट के निर्णयों को लागू करने का कार्य करेगा। ट्रस्ट की संगठनात्मक संरचना में महासचिव का पद सबसे प्रभावशाली बना रहेगा।
ट्रस्ट की संरचना में महासचिव का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। महासचिव ट्रस्ट की बैठकों के संचालन, एजेंडा तय करने, प्रस्तावों के क्रियान्वयन की निगरानी, विभिन्न समितियों और प्रशासन के बीच समन्वय तथा ट्रस्ट की ओर से लिए गए निर्णयों के अनुपालन की जिम्मेदारी निभाता है। सीईओ भी अपने कार्यों के लिए ट्रस्ट और व्यावहारिक रूप से महासचिव के प्रति जवाबदेह रहेगा। सीईओ की प्रमुख जिम्मेदारी राम मंदिर परिसर की प्रशासनिक और प्रबंधकीय व्यवस्था का संचालन करना होगी।
इसमें मंदिर के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, कर्मचारियों का प्रबंधन, मानव संसाधन, वित्तीय अनुशासन, सुरक्षा व्यवस्था, जनसंपर्क, श्रद्धालु सुविधाओं का विस्तार, भीड़ प्रबंधन तथा विभिन्न एजेंसियों के साथ तालमेल शामिल रहेगा। इसके अलावा मंदिर परिसर में होने वाले बड़े धार्मिक आयोजनों, उत्सवों और विशेष अवसरों की व्यवस्थाओं की निगरानी भी सीईओ की जिम्मेदारी होगी।
स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले सकेगा सीईओ
ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार सीईओ स्वतंत्र रूप से नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेगा। उसकी भूमिका ट्रस्ट की ओर से निर्धारित नीतियों और निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू करने की होगी। वित्तीय, प्रशासनिक और विकास संबंधी महत्वपूर्ण मामलों में अंतिम निर्णय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का ही होगा। सीईओ को आवश्यकता के अनुसार अपने अधीन एक सचिव रखने की भी अनुमति होगी, जो प्रशासनिक कार्यों के संचालन और समन्वय में उसकी सहायता करेगा।




