भारतीय ने एक्स पर किया ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर झूठा दावा

संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब केवल आसमान या होर्मुज तक सीमित नहीं रह गया है। मिसाइलों और ड्रोन हमलों की सुर्खियों के बीच सोशल मीडिया पर मीम्स और फेक न्यूज के माध्यम से एक शांत लेकिन खतरनाक लड़ाई चल रही है। आरोप और प्रत्यारोप का सिलसिला अब वास्तविक समय में युद्ध और रुकी हुई युद्धविराम वार्ता को भी प्रभावित कर रहा है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक सनसनीखेज और असत्यापित दावा इंटरनेट के एक अनजान कोने से शुरू हुआ। कुछ ही घंटों में यह खबर इजरायल और अमेरिका के प्रमुख समाचार माध्यमों के फ्रंट पेज तक पहुंच गई। यहां तक कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने भाषण में इसका जिक्र किया और संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप प्रशासन के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने भी इसे साझा किया।
वायरल पोस्ट में दावा किया गया था कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के कमांडर जनरल अहमद वाहिदी ने कहा है कि उनका देश तब तक परमाणु हथियार बनाने की अपनी कोशिशें नहीं छोड़ेगा, जब तक इजरायल और अमेरिका के पास परमाणु हथियार मौजूद हैं।
इस पोस्ट के साथ जनरल की एक तस्वीर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा बनाई गई मशरूम क्लाउड यानी परमाणु विस्फोट के धुएं की तस्वीर थी।
इजरायली नेताओं के भाषणों तक पहुंचा फेक क्लेम
इस बात का कोई सबूत नहीं था कि कमांडर ने कभी ऐसा बयान दिया था, और न ही इस बात के कोई प्रमाण थे कि ईरान ने परमाणु हथियार बना लिया है। इसके बावजूद यह दावा तेजी से फैलने लगा।
इजरायली सोशल मीडिया अकाउंट्स ने इस फर्जी बयान को उठाया और जल्द ही वहां के एक टेलीविजन चैनल ने इसे प्रसारित करते हुए दावा किया कि यह ईरान का पहला खुला कबूलनामा है कि वह परमाणु बम बना रहा है।
उसी शाम, यरुशलम में इजरायल के राष्ट्रीय कब्रिस्तान माउंट हर्जल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण में भी यह बात शामिल हो गई, जहां उन्होंने इसे ईरान के खतरनाक इरादों का सबूत बताया।
वॉशिंगटन में संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप प्रशासन के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने इस दावे को ऑनलाइन साझा करते हुए कहा कि ईरान आखिरकार वह मान रहा है जो सालों से साफ था। फ्लोरिडा के सीनेटर रिक स्कॉट ने भी इसे री-पोस्ट किया, और फॉक्स न्यूज ने भी इस फर्जी दावे को अपनी कवरेज में शामिल किया।
भारतीय एक्स अकाउंट से हुई थी शुरुआत
द टाइम्स के अनुसार, जब इस पोस्ट के सफर की पड़ताल की, तो पता चला कि यह लगभग 1,75,000 फॉलोअर्स वाले एक भारतीय एक्स अकाउंट से शुरू हुआ था। दो घंटे के भीतर, 82,000 फॉलोअर्स वाले एक अन्य भारतीय अकाउंट ने इसका हिंदी अनुवाद साझा किया।
मोसाद कमेंट्री नामक इजरायली अकाउंट ने इस दावे को और आगे बढ़ाया। हालांकि, इस अकाउंट का नाम इजरायल की खुफिया एजेंसी जैसा है, लेकिन इसका एजेंसी से कोई पुष्ट संबंध नहीं है। इस अकाउंट ने यह दिखाने की कोशिश की कि ईरान सद्भाव के साथ बातचीत करने के बजाय टालमटोल कर रहा है।
आधे घंटे बाद इजरायल के चैनल 14 ने इस कथित बयान को अंग्रेजी में प्रसारित किया। प्रधानमंत्री के बेटे और राजनीतिक टिप्पणीकार याइर नेतन्याहू ने कुछ ही मिनटों में इस पोस्ट को और प्रचारित कर दिया। इसके तीन घंटे से भी कम समय में, यह फर्जी दावा उनके पिता के भाषण का हिस्सा बन गया।
ईरान ने किया दावे को खंडन
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इस वायरल पोस्ट को इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ झूठ की बाढ़ का एक उदाहरण बताकर पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने बिना कोई सबूत दिए इस तरह के दावों के पीछे इजरायल का हाथ होने का आरोप लगाया। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने के लिए दो दशकों से इसी तरह के झूठे आरोपों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ज्ञात हो कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तीन दशकों से अंतरराष्ट्रीय जांच हो रही है, हालांकि तेहरान का हमेशा से यही कहना है कि यह केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है। यह परमाणु कार्यक्रम उन प्रमुख कारणों में से एक था जिसका हवाला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ अपने अभियानों को सही ठहराने के लिए देते हैं।
जैसे ही इस दावे की सच्चाई पर सवाल उठने लगे, माइक वाल्ट्ज की पोस्ट को बिना कोई स्पष्टीकरण दिए चुपचाप एक्स से हटा दिया गया। यह पूरी घटना इस बात को दर्शाती है कि कैसे एक अनजान अकाउंट द्वारा गढ़ा गया एक फर्जी बयान कुछ ही घंटों में सीमाओं और भाषाओं की बाधाओं को पार कर सकता है।
इससे पहले कि कोई इसकी सत्यता को सत्यापित कर पाता, इसने सर्वोच्च स्तर पर राजनीतिक बयानबाजी की दिशा ही तय कर दी।


