काठमांडू में Gen-Z मांग रहे इस्तीफा, अपनों ने भी खोला मोर्चा

नेपाल में बालेन शाह की सरकार को बनाने वाले Gen-Z अब खुद इसी सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं। नेपाल में नई सरकार को बने जहां 150 दिन भी नहीं हुए हैं, वहीं बालेन शाह को लोगों के गुस्से, संसद के दबाव और पार्टी की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।
बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के दो महीने बाद ही, युवा प्रदर्शनकारी उनके इस्तीफे की मांग को लेकर काठमांडू के माइतीघर मंडला में फिर से जमा हुए।
नेपाल में बालेन शाह की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
विपक्षी सांसदों ने बालेन शाह को घेरते नजर आ रहे हैं। वे संसद से उनकी बार-बार गैर-मौजूदगी पर सवाल उठा रहे हैं। स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल के 26 अगस्त को उन्हें पेश होने और सांसदों के सवालों का जवाब देने का निर्देश दिया है। अब तक बालेन शाह 39 बैठकों में से सिर्फ पांच में ही शामिल हुए हैं।
बालेन शाह ने 27 मार्च को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन शाह के अब तक लिए फैसलों ने लोगों को सड़कों पर फिर एक बार जमा किया है। बालेन की सरकार बनने से पहले जो Gen-Z उनके साथ थे, अब वे ही उनके खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
भारत-नेपाल बॉर्डर पर कस्टम ड्यूटी लगाने का नुकसान
-बालेन शाह के इस फैसले से नेपाल की तरफ के सीमावर्ती कस्बों में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए, जिसके बाद अधिकारियों को इस कदम में ढील देनी पड़ी।
भारत के साथ नेपाल के सीमा विवाद पर भी शाह को लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा, जब भारत के इलाके में नेपाल के अतिक्रमण के बारे में उनके बयान से विपक्ष नाराज हो गया।
भारत के साथ सीमा से सटे दक्षिणी नेपाल में हिंसक सांप्रदायिक झड़पों ने दबाव और बढ़ा दिया। देर से प्रतिक्रिया देने पर आलोचना के बाद शाह को देश को संबोधित करना पड़ा।
भारतीय सेना में नेपालियों की भर्ती की मांग
पोखरा में, पूर्व गोरखा सैनिकों ने ‘अग्निपथ’ योजना के तहत भारतीय सेना में नेपालियों की रुकी हुई भर्ती के समाधान की मांग जारी रखी।
यह तनाव RSP के भीतर भी फैल गया है, जहां सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के ढांचे से शाह की दूरी और उनके एकतरफा कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
RSP सांसद जगदीश खरेल ने संसद में बोलते हुए पार्टी के भीतर से ही तीखी आलोचना की और कहा, ‘अगर सिर्फ PM की गरिमा बनी रहती है तो सरकार नहीं टिकेगी। हमारी गरिमा भी बनी रहनी चाहिए।’



