
सत्य निकेतन में जर्जर इमारत गिरने के हादसे के बाद एमसीडी ने अपने भवनों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। एमसीडी ने अपने 14 आयुर्वेद स्वास्थ्य केंद्रों के भवनों को जर्जर और असुरक्षित पाए जाने के बाद तत्काल बंद कर दिया है। इन केंद्रों में मरीजों का इलाज और कर्मचारियों का कामकाज रोक दिया गया है।
खास बात यह है कि संबंधित केंद्र प्रभारियों की रिपोर्ट के माध्यम से इन भवनों की खराब हालत की जानकारी एमसीडी के सामने आई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए केंद्रों को बंद करने का फैसला किया। सत्य निकेतन में जर्जर भवन गिरने से हुई जनहानि के बाद एमसीडी के सामने शहरभर में खतरनाक और जर्जर इमारतों की जांच तथा कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हुए थे। इसके बाद निगम ने ऐसे भवनों पर विशेष फोकस बढ़ाया है। इसी कड़ी में एमसीडी की अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं वाले भवन भी जांच के दायरे में आए हैं।
आयुर्वेद विभाग का मानना है कि असुरक्षित भवनों में स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखकर मरीजों और कर्मचारियों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती। इसलिए पहले उन्हें इन भवनों से बाहर करने का निर्णय लिया गया है। बंद किए गए आयुर्वेद केंद्रों में बल्लिमारान, कृष्णा नगर, पश्चिम आजाद नगर, गांधी नगर, नवादा, पहाड़ी धीरज, सीताराम बाजार, सुल्तानपुर माजरा, भरथल, कैर, ओंकार नगर, आरबीटीबी अस्पताल, मुबारकपुर डबास और रोहताश नगर शामिल हैं। इन केंद्रों में आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज आयुर्वेदिक उपचार के लिए पहुंचते थे।
अपनी ही इमारतों में जगह उपलब्ध कराने की कोशिश
एमसीडी अब इन केंद्रों को नजदीकी व्यावहारिक स्थानों पर स्थानांतरित करने की तैयारी कर रही है। निगम की कोशिश है कि केंद्रों को अपनी ही इमारतों में जगह उपलब्ध कराकर उसी वार्ड में संचालित किया जाए। इसके लिए इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य और सीएसडी समेत संबंधित विभागों के भवनों में स्थान तलाशा जा रहा है। इससे मरीजों को उपचार के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और कर्मचारियों के लिए भी सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराया जा सकेगा।




