इंदौर पर मंडराया जल संकट: निगम ने घर-घर सर्वे शुरू किया

इस साल मानसून की बेरुखी ने इंदौर और आसपास के इलाकों में चिंता की घंटी बजा दी है। कुल 23 इंच बारिश के साथ मानसून सीजन समाप्त हो चुका है, जो कि सामान्य औसत से लगभग 14 इंच कम है। इसके साथ ही यह पिछले 26 वर्षों में शहर का दूसरा सबसे सूखा मानसून दर्ज किया गया है।
यदि अक्टूबर के महीने में बारिश की मेहरबानी नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में शहरवासियों को पेयजल संकट और किसानों को गंभीर कृषि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। नगर निगम ने भी इंदौर में घर-घर सर्वे शुरू कर दिया है। यह पता लगाया जा रहा है कि किस घर में पानी की कितनी आवश्यकता है। सर्वे में पूछा जा रहा है कि घर में कितने सदस्य हैं, कितने किराएदार हैं और कितना पानी लगता है। निगम के कर्मचारी हर घर जाकर डाटा इकट्ठा कर रहे हैं।
तालाब खाली, जलस्तर गिरा
बारिश बेहद कम होने के कारण इंदौर के प्रमुख तालाब अपनी क्षमता के अनुसार भर नहीं पाए हैं। ग्रामीण इलाकों में भूजल स्तर नीचे जाने से रबी फसल के लिए गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
10 वर्षों में सबसे सूखा सितंबर
इस वर्ष सितंबर के पूरे महीने में केवल 125 मिमी बारिश हुई है, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम है (2016 के बाद सबसे कम)। जहां वर्ष 2013 और 2019 में इंदौर में 1300 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई थी, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा आधा भी नहीं पहुंच सका (2026 में मात्र 590 मिमी)।
10 वर्षों में सबसे सूखा सितंबर
शहर में सितंबर-अक्टूबर में ही यह हालात हो गए हैं कि बोरिंग में पानी नहीं आ रहा। इस साल पड़ी भीषण गर्मी के बाद पहले ही कई क्षेत्रों में बोरिंग का पानी पूरी तरह से सूख गया था। बारिश न होने से हालात और भी खराब हो गए हैं। अभी कई क्षेत्रों में निगम को टैंकर भेजना पड़ रहे हैं।
इंदौर में कम बारिश के 5 मुख्य कारण
अल नीनो का प्रभाव: प्रशांत महासागर में बने अल नीनो के प्रभाव से मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ गईं, जिसका सीधा असर मालवा अंचल और पश्चिमी मध्य प्रदेश पर पड़ा।
बंगाल की खाड़ी के सिस्टम्स का भटकाव: इस सीजन में बंगाल की खाड़ी से उठे निम्न दाब के क्षेत्र या तो उत्तरी मध्य प्रदेश की तरफ मुड़ गए या फिर मालवा पहुंचते-पहुंचते निष्प्रभावी हो गए।
विदर्भ और दक्षिणी हिस्सों में सिस्टम का केंद्रित होना: मानसून के प्रभावी वेदर सिस्टम ज्यादातर मध्य प्रदेश के दक्षिणी जिलों और विदर्भ तक ही सीमित रहे, जिससे इंदौर को इसका लाभ नहीं मिल सका।
गुजरात और मालवा सीमा पर सिस्टम का न बनना: आमतौर पर गुजरात या पश्चिमी एमपी की सीमा पर बनने वाले स्थानीय सिस्टम मालवा में अच्छी बारिश लाते हैं, लेकिन इस बार ऐसा कोई सिस्टम विकसित नहीं हुआ।
अरब सागर से नमी का अभाव: अरब सागर की ओर से कोई मजबूत मानसूनी सिस्टम या ट्रफ लाइन न बनने से इंदौर और मालवा क्षेत्र को लगातार नमी वाली मानसूनी फुहारें नहीं मिल सकीं।
निगम ने सर्वे शुरू किया
तालाबों के न भरने और भूजल के गिरते स्तर को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार बैठकें कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि शहर में सर्वे करवाए जा रहे हैं ताकि पानी की जरूरत कितनी है इसकी सही स्थिति पता चल सके। नगर निगम की टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं। जल्द ही टैंकरों और अन्य माध्यमों से पानी की व्यवस्था के लिए रोडमैप बनाया जाएगा।





