
राज्य गठन के करीब 26 साल बाद पहली बार चंपावत जिले के बनबसा में मंत्रिमंडल की बैठक हुई। चुनावी वर्ष में सरकार ने युवाओं को बड़ी सौगात दी। बैठक में कुक्कुट पालन, विभागीय समन्वय और युवाओं की स्किलिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई गई।
आज हुई इस बैठक से धामी सरकार ने साफ संदेश दिया है कि कैबिनेट की बैठकें अब केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में ऐसी बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि स्थानीय परिस्थितियों, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय जरूरतों को नजदीक से समझते हुए निर्णय लिए जा सकें।
ये हुए फैसले
पहाड़ी क्षेत्रों के कुक्कुट पालकों के लिए फीड पर सरकार की ओर से सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया। यह सहायता डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से संबंधित लाभार्थियों के वेलफेयर अकाउंट में पहुंचाई जाएगी। सरकार के मुताबिक इस फैसले से करीब 2,000 कुक्कुट पालकों को लाभ मिलेगा और इसके लिए लगभग दो करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी।
कैबिनेट ने पशुपालन, मत्स्य और डेयरी विकास विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी फैसला लिया है। इसके तहत इन तीनों विभागों के समन्वय के लिए डायरेक्टर जनरल के पद को अपग्रेड करने को मंजूरी दी गई है। सरकार का उद्देश्य तीनों क्षेत्रों से जुड़े कार्यों में बेहतर तालमेल और प्रशासनिक समन्वय स्थापित करना है।
युवाओं को लेकर भी बैठक में अहम निर्णय लिया गया। सरकार के अनुसार कुछ विषयों के छात्रों को ग्रेजुएशन के बाद रोजगार के लिए जरूरी व्यावहारिक और तकनीकी दक्षता को मजबूत करने के लिए विद्यार्थियों को स्किल आधारित कोर्स उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक सेमेस्टर में छह क्रेडिट के इन कोर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समेत नई तकनीकों और रोजगार से जुड़ी अन्य आवश्यक स्किल को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य डिग्री के साथ युवाओं को उद्योग और बदलते रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
सीमांत गांवों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक विकास की गति को समान रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में होंगी कैबिनेट बैठकें
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कैबिनेट की बैठकें अब केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में भी आयोजित की जाएंगी। इससे स्थानीय स्तर की समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सीधे शासन के समक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
कहा कि सीमांत क्षेत्र केवल राज्य की भौगोलिक सीमाएं नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा, संस्कृति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को और मजबूत किया जाए।
सरकार का उद्देश्य शासन को जनता के और करीब ले जाना है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कैबिनेट की बैठकें आयोजित होने से वहां की स्थानीय परिस्थितियों, जन अपेक्षाओं और विकास की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। साथ ही, स्थानीय समस्याओं पर त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया भी प्रभावी होगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड के हर क्षेत्र का संतुलित विकास राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है। सीमांत गांवों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक विकास की गति को समान रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।



