
उपराज्यपाल टीएस संधू ने दिल्ली अग्निशमन सेवा में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए पूर्व अग्निवीरों की सेवाएं लेने का सुझाव दिया है। सोमवार को हुई दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) डीडीएमए की बैठक में यह सुझाव एलजी ने दिया।
डीडीएमए की बैठक में उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित और अनुशासित मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पूर्व अग्निवीरों को दमकल विभाग में शामिल किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, इससे विभाग में मौजूद कर्मियों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी, वहीं आपात स्थितियों से निपटने के लिए पहले से प्रशिक्षित युवाओं का अनुभव भी राजधानी को मिलेगा। बैठक में दिल्ली में अग्निशमन केंद्रों की संख्या बढ़ाने और आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने की योजनाओं की भी समीक्षा की गई।
एआई दिखाएगा दमकल, एंबुलेंस को सबसे तेज रास्ता
नई दिल्ली। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ट्रैफिक प्रबंधन और रूट मैपिंग सिस्टम लागू करने जा रही है। इसके जरिये आग लगने, दुर्घटना या अन्य आपात स्थितियों में दमकल वाहनों और एंबुलेंस को सबसे तेज और कम भीड़ वाले रास्ते की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य उन महत्वपूर्ण मिनटों को बचाना है, जिन पर अक्सर किसी व्यक्ति की जिंदगी और मौत टिकी होती है। अधिकारियों के अनुसार ट्रैफिक पुलिस की एआई आधारित प्रणाली हजारों सीसीटीवी कैमरों से मिलने वाले लाइव फीड और ट्रैफिक डेटा का विश्लेषण कर यह बताएगी कि किस मार्ग पर कितना दबाव है और किस रास्ते से इमरजेंसी वाहन सबसे कम समय में गंतव्य तक पहुंच सकते हैं। दिल्ली पुलिस-अग्निशमन सेवा के नियंत्रण कक्षों के बीच बेहतर समन्वय भी विकसित किया जाएगा। रास्ता खाली कराने को अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया जाएगा।
ट्रैफिक पैटर्न का भी होगा अध्ययन
अधिकारियों का कहना है कि नई प्रणाली तत्काल रूट बताने के साथ शहर के ट्रैफिक के पैटर्न का अध्ययन भी करेगी। इससे समझने में मदद मिलेगी कि किस इलाके में किस समय सबसे अधिक जाम रहता है और किन मार्गों को इमरजेंसी कॉरिडोर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे भविष्य में क्षेत्रवार आपातकालीन प्रतिक्रिया योजनाएं भी तैयार होंगी।
विदेशों में फायर सर्विस तकनीक, डाटा, मजबूत संचार नेटवर्क से जुड़ी
लंदन, सिंगापुर और न्यूयॉर्क जैसे शहरों ने फायर सर्विस को तकनीक, डाटा और संचार नेटवर्क से जोड़ा गया है। किस इलाके में आग का जोखिम ज्यादा है, कहां नई इमारतें बनी हैं, किस समय ट्रैफिक बढ़ता है, इन सभी आंकड़ों के आधार पर विदेशों में संसाधन तैनात किए जाते हैं। लंदन में फायर ब्रिगेड का रिस्पांस टाइम सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किया जाता है। सिंगापुर में कॉल आने के बाद नजदीकी स्टेशन नहीं, बल्कि ट्रैफिक, उपलब्ध संसाधन और जोखिम स्तर देखकर वाहन भेजे जाते





