
राजस्थान में ट्रांस्पोर्ट विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार की कहानी आपको हैरान कर देगी। यहां परिवहन विभाग के अधिकारी गिरोह बनाकर वसूली का काम कर रहे हैं और वाहनों से अवैध वसूली के लिए दलालों के मार्फत कॉल सेंटर तक चला रहे हैं, जहां रिश्वत की राशि नकद के अलावा ऑनलाइन तक करने की सुविधा दी जा ही है। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गुरुवार देर शाम परिवहन विभाग में फैले संगठित भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की। महानिदेशक गोविन्द गुप्ता के निर्देशन में एसीबी की 12 टीमों ने अजमेर संभाग के ब्यावर, नसीराबाद, विजयनगर, केकड़ी, किशनगढ़ और अजमेर कार्यालयों से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों के 11 ठिकानों पर आकस्मिक सर्च ऑपरेशन चलाया ।
वसूली का तरीका: कोड वर्ड और कॉल सेंटर
एसीबी की जांच में सामने आया है कि परिवहन अधिकारी प्राइवेट दलालों के साथ मिलकर राजमार्गों पर चलने वाले वाहनों से 600 से 1000 रुपए तक की अवैध वसूली कर रहे थे । यह वसूली ‘शेरे पंजाब’ और ‘जगदम्बा टी स्टॉल’ जैसे होटलों और ढाबों के माध्यम से की जा रही थी । दलाल एक कॉल सेंटर की तरह व्यवस्था चला रहे थे, जहाँ पेमेंट (नकद या पेटीएम) मिलने के बाद वाहनों के नंबर संबंधित आरटीओ टीम को ‘कोड वर्ड’ में फॉरवर्ड किए जाते थे ताकि उन्हें बिना चेकिंग के पास किया जा सके ।
निरीक्षक समेत 13 डिटेन
एसीबी की कार्यवाही में परिवहन विभाग के निरीक्षक जलसिंह एवं उनके प्राईवेट सहायक प्रदीप जोधा, दलाल विक्रम सिंह पिपरोली व संजय यादव, ढाबा संचालक बुधे सिंह महेन्द्र कुमार, सुनील कुमार तथा परिवहन विभाग के संविदा गार्ड लक्ष्मण काठात, गुलाब काठात एवं संदिग्ध रामूराम, मनोहर गांधी, बुद्विप्रकाश प्रजापत तथा कृष्णा सिंह कुल 13 व्यक्तियों को अग्रीम कार्यवाही हेतु डिटैन किया गया है, जिनसे 1,16,700 रूपये की संदिग्ध राशि, 19 मोबाईल, 4 सीसीटीवी डीवीआर, 12 संदिग्ध डायरियां जिनमें लाखों रूपये का हिसाब किताब एवं हजारों रूपयों का डीजीटल पैमेन्ट का रिकॉर्ड प्राप्त हुआ है।





