
प्रदेश में योग प्रशिक्षित बेरोजगारों को सरकारी स्कूलों में तैनाती की मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद भी बेरोजगारों को तैनाती नहीं मिली। अब शिक्षा निदेशालय का कहना है कि हर स्कूल में योग प्रशिक्षक की व्यवस्था करना संभव नहीं है। जिसे देखते हुए व्यायाम शिक्षकों को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से डिप्लोमा, डिग्री कोर्स के लिए प्रेरित किया जाए।
जिस प्रदेश से योग को देश और दुनिया में इतनी प्रसिद्धि मिली, उसी प्रदेश में योग प्रशिक्षित युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। स्थिति यह है कि सरकारी स्कूलों में उनकी तैनाती के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा और 31 दिसंबर 2021 को मंत्रिमंडल की घोषणा के बाद 22 फरवरी 2025 को इसका शासनादेश और 28 फरवरी 2025 को पदों की स्वीकृति मात्र छह दिन के लिए दी गई। 11 अप्रैल 2025 को एक अन्य आदेश जारी कर पूर्व के आदेश को संशोधित किया गया लेकिन योग प्रशिक्षित बेरोजगारों को हर जिले के एक स्कूल में अब तक तैनाती नहीं मिली।
10 लाख बच्चे मुफ्त कॉपियों के लिए कर रहे इंतजार
प्रदेश के सरकारी और अशासकीय विद्यालयों के 10 लाख छात्र-छात्राओं को मुफ्त कॉपियां (नोटबुक्स) मिलनी थीं। अप्रैल 2025 में कैबिनेट में इसके प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी लेकिन इन स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से 12 वीं तक के बच्चे इसके लिए इंतजार हीं करते रह गए।
योग प्रशिक्षित बेरोजगारों को स्कूलों में तैनाती नहीं मिली, शिक्षा निदेशालय इसके लिए सीईओ कार्यालय तो सीईओ कार्यालय से शिक्षा निदेशालय जाने के लिए कहा जा रहा है। जो बेरोजगारों के साथ मजाक है। – अमित नेगी, प्रदेश अध्यक्ष योग शिक्षक संगठन
योग प्रशिक्षितों के मामले में सभी सीईओ को निर्देश जारी किया गया है, स्कूलों में तैनाती सीईओ के स्तर से दी जानी है। रही बच्चों को मुफ्त कॉपियां देने की बात तो बच्चों को जल्द इसे उपलब्ध करा दिया जाएगा। – डॉ.मुकुल सती, माध्यमिक शिक्षा निदेशक





