अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की हद पार कर रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान के पहले कैथोलिक संघीय अल्पसंख्यक मंत्री और धार्मिक स्वतंत्रता के बड़े समर्थक शाहबाज भट्टी की हत्या के 15 साल बाद भी ईसाई, हिंदू और अहमदी जैसे अल्पसंख्यक समुदायों को देश भर में भेदभाव और पूजा स्थलों पर हमलों का सामना करना पड़ रहा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, इन अत्याचारों में अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह के साथ-साथ देश के ईशनिंदा कानूनों का गलत इस्तेमाल भी शामिल है। तुर्किए की पत्रकार उजे बुलुत ने अमेरिकी मीडिया आउटलेट पीजे मीडिया में लिखा है कि ये लगातार हो रहे अत्याचार पाकिस्तान के समान नागरिकता के संवैधानिक वादे का खुला उल्लंघन हैं।
तुर्किए की पत्रकार ने क्या कहा?
बुलुत ने कहा, “शाहबाज भट्टी के नेतृत्व में चलाए गए अभियान के बाद 2009 में पाकिस्तान में 11 अगस्त को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक दिवस घोषित किया गया था। यह तारीख 11 अगस्त, 1947 को पाकिस्तान की संविधान सभा में मुहम्मद अली जिन्ना के ऐतिहासिक भाषण की याद दिलाती है, जिसमें देश के संस्थापक ने कहा था कि नागरिक अपने धर्म का पालन करने के लिए स्वतंत्र हैं और समान नागरिकता के मामले में धर्म की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए।”
अल्पसंख्यकों की पाकिस्तान सरकार से मांग
पिछले हफ्ते पाकिस्तान के तीन बड़े शहरों में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के कई सदस्यों और सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ताओं ने सालाना अल्पसंख्यक अधिकार मार्च में हिस्सा लिया। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से जबरन धर्म-परिवर्तन को अपराध घोषित करने और अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच शादी से जुड़े पर्सनल कानूनों में बदलाव करने की मांग की ताकि अल्पसंख्यक जीवनसाथी और बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।
उन्होंने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को मानने की भी अपील की, जिनमें जबरन धर्म-परिवर्तन के खिलाफ मजबूत सुरक्षा उपाय और ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग से बचाव शामिल है।




