अध्यात्म

अष्टमी, नवमी या दशमी, नवरात्र में कब करें कलश विसर्जन?

नवरात्र का पर्व मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का प्रतीक है। नौ दिनों में भक्त पूरे विधि-विधान से माता रानी की पूजा करते हैं। घरों और मंदिरों में कलश स्थापना की जाती है और नौ दिनों तक अखंड ज्योत जलाकर मां दुर्गा की आराधना की जाती है। नवरात्रि के अंतिम दिनों में भक्तों के मन में सवाल आता है कि कलश विसर्जन अष्टमी, नवमी या दशमी में से किस दिन करना चाहिए? इस विषय पर हमारी बातचीत उज्‍जैन के पंडित एवं ज्‍योतिषाचार्य मनीष शर्मा से हुई। वह कहते हैं, “घरों में नवमी के दिन और मंदिरों में जहां दुर्गा जी की स्‍थापना हुई होती है वहां दशमी के दिन कलश का विसर्जन करना चाहिए। ” आइए जानते हैं कलश विसर्जन का सही दिन, शुभ मुहूर्त और पूरी विधि।

कलश विसर्जन अष्टमी, नवमी या दशमी में कब करें?
कई घरों में महानवमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन के बाद कलश विसर्जन किया जाता है। वहीं, कुछ जगह पर विजयादशमी यानी दशमी के दिन कलश और जवारे का विसर्जन करते हैं। अष्टमी के दिन कलश विसर्जन करना जरूरी नहीं है। इस दिन मुख्य रूप से मां महागौरी की पूजा, कन्या पूजन और हवन किया जाता है। हालांकि, जो लोग अष्‍टमी को ही व्रत का पारण कर लेते हैं, वो कलश और जवारों का विर्सजन भी कर देते हैं। पंडित मनीष जी कहते हैं, “सबसे अच्‍छा तो होता है कि नवरात्र की नवमी तिथि पर कलश का विसर्जन हो, मगर घरों में जैसे परंपरा चली आ रही है, उसके आधार पर भी तय कर सकते हैं। “

शारदीय नवरात्र 2026 में नवमी की तिथि और मुहूर्त
शारदीय नवरात्र 2026 में महानवमी 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी। नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी।

19 अक्टूबर को नवमी पूजा, हवन और कन्या पूजन का शुभ समय सुबह 10 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक बताया गया है। भक्त इस दौरान मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं और कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद ले सकते हैं। इसके बाद आप कलश विसर्जन कर सकते हैं।

दशमी के दिन कलश विसर्जन का शुभ समय
विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन मां दुर्गा की विदाई और कलश विसर्जन किया जा सकता है। पंचांग के अनुसार दशमी के दिन सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक शुभ समय बताया गया है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। दुर्गा विसर्जन के लिए दोपहर 1 बजकर 14 मिनट से 3 बजकर 30 मिनट तक का समय भी अच्‍छा रहेगा है।

कलश विसर्जन की सही विधि
कलश विसर्जन करते समय साफ-सफाई और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसकी सामान्य विधि इस प्रकार है।

सबसे पहले माता रानी के सामने दीपक जलाएं और फूल, फल, मिठाई तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। मां दुर्गा से परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की प्रार्थना करें।
माता की आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद दें।
पूजा पूरी होने के बाद कलश के ऊपर रखा नारियल और अन्य पूजन सामग्री श्रद्धापूर्वक हटाएं। नारियल को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जा सकता है।
कलश में रखे जल को पवित्र माना जाता है। इसे आम के पत्तों की सहायता से घर में छिड़क सकते हैं। चाहें तो पौधों में भी डाल सकते हैं।
जवारे को सम्मानपूर्वक उठाएं। इन्हें किसी स्वच्छ और उपयुक्त स्थान पर मिट्टी में प्रवाहित या विसर्जित करें। नदी में विसर्जन करते समय पर्यावरण और स्थानीय नियमों का ध्यान रखें।

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