
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत अब विभिन्न कारणों से असहाय लोगों का ई-केवाईसी न होने पर भी राशन बंद नहीं होगा। पंजाब सरकार के इस प्रस्ताव को केंद्र ने मंजूरी दे दी है। इतना ही नहीं, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय अन्य राज्यों के लिए भी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करेगा ताकि इसे अन्य सूबों में भी लागू करवाया जा सके।
पंजाब में ई-केवाईसी न होने के कारण कई परिवारों का राशन रुक गया था। पंजाब सरकार ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जरिये केंद्र के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए डिपो धारकों के माध्यम से ई-पॉस मशीनों द्वारा बायोमीट्रिक ई-केवाईसी शुरू किया था। इस दौरान कई ऐसे लोग थे जिनका विभिन्न कारणों से ई-केवाईसी नहीं हो पाया। करीब तीन हजार मामलों में लोगों की अंगुलियों के निशान घिस चुके हैं, कुछ की आंखों की रोशनी चली गई है, कुछ दृष्टिबाधित हैं, कुछ अत्यधिक बीमार होकर बिस्तर पर हैं, कई वयोवृद्ध होकर चलने-फिरने में असमर्थ हैं तो कुछ हाथों से दिव्यांग हैं।
इनके अलावा भी कई अन्य कारणों से लाभार्थियों की ई-केवाईसी अपडेट नहीं हो पाई, जिससे उनका राशन बंद हो गया और राशन कार्ड अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिए गए।
ऐसे हजारों मामले सामने आने के बाद पंजाब सरकार ने आंगनवाड़ी वर्करों और फूड सप्लाई इंस्पेक्टरों के माध्यम से इन लोगों तक पहुंचकर सर्वे करवाया था। उन्हें विशेष संवेदनशील श्रेणी (स्पेशल वल्नरेबल कैटेगरी) में रखते हुए राशन शुरू करवाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था।
केंद्र सरकार ने पंजाब के इस प्रस्ताव पर संज्ञान लेते हुए ऐसे लोगों को विशेष श्रेणी में शामिल किया है। अब भौतिक सत्यापन के बाद बिना ई-केवाईसी के भी उनका राशन जारी कर दिया जाएगा। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अब पंजाब के सभी पात्र लाभार्थियों को राशन मिलेगा।
यह है योजना
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत प्रति परिवार/प्रति सदस्य पांच किलोग्राम मुफ्त अनाज (गेहूं या चावल) उपलब्ध कराया जाता है। इसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे में आने वाले प्राथमिकता वाले परिवारों को दिया जाता है। केंद्र सरकार ने इसे अगले पांच वर्षों के लिए मुफ्त कर दिया है। कई मामलों में मृत व्यक्तियों, फर्जी नामों या पलायन कर चुके लोगों के नाम पर राशन उठाया जा रहा था, इसलिए लाभार्थियों की ई-केवाईसी अनिवार्य की गई थी।




