कभी जापान-जर्मनी से ‘रफ्तार’ मांगने वाला भारत, अब निर्यात करेगा ट्रेन

एक समय था जब भारत ट्रेनों के टेक्नोलॉजी के लिए विदेशों पर निर्भर था। खासकर जापान, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और इंग्लैंड जैसे देशों पर। इन देशों से हमनें अपने ट्रेन के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए अलग-अलग चीजें निर्यात की। जैसे जापान की मदद से भारत अपनी पहली बुलेट ट्रेन बना रहा है। 15 अगस्त 2027 से मुंबई से अहमदाबाद रूट पर बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू हो सकता है। लेकिन इन सबके बीच भारत अब सिर्फ आयातक ही नहीं, बल्कि निर्यातक भी बनने वाला है। वो दिन दूर नहीं जब विदेशी सरजमीं पर भारत की वंदे भारत दौड़ लगाती दिखेगी।
भारतीय रेलवे वंदे भारत ट्रेन को एक्सपोर्ट (India Plans to Export Vande Bharat Train) करने की योजना बना रहा है। कई देशों ने पहले ही इसके लिए इंटरेस्ट दिखा रखा है। भारत को उम्मीद है कि कम लागत वाला यह सेमी-हाई-स्पीड रेल मॉडल उन विकासशील देशों को पसंद आएगा, जो बुलेट ट्रेन नेटवर्क के भारी-भरकम खर्च के बिना अपने पुराने हो चुके रेलवे सिस्टम को आधुनिक बनाना चाहते हैं।
भारतीय रेलवे की बड़ी तैयारी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी कंपनी RITES और भारतीय रेलवे मिलकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए वंदे भारत ट्रेन का एक ‘स्टैंडर्ड-गेज’ वर्जन तैयार कर रहे हैं। भारत वंदे भारत को चीन, जापान और फ्रांस जैसे देशों द्वारा निर्मित महंगी हाई-स्पीड रेल प्रणालियों के एक अधिक व्यावहारिक और किफायती विकल्प के रूप में पेश कर रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों ने पहले ही इसमें दिलचस्पी दिखाई है। इसके अलावा भारत अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी इसके लिए मौके तलाश रहा है। बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के प्रतिनिधिमंडलों ने ट्रेनों का निरीक्षण करने और स्थानीय परिचालन के लिए उनकी उपयुक्तता का आकलन करने हेतु पहले ही भारत का दौरा कर लिया है।
रेल ऑपरेटर नहीं, अब आपूर्तिकर्ता बनेगा भारत
यानी आने वाले समय में इन देशों में भारत की वंदे भारत ट्रेन दौड़ती दिख सकती है। भारत अब मुख्य रूप से एक रेल ऑपरेटर होने से हटकर, अब वह ‘ग्लोबल साउथ’ को किफायती परिवहन तकनीक का आपूर्तिकर्ता बनने की ओर अग्रसर है। अभी तक आप और हम यही खबर सुनते थे कि भारत ने इस देश से इस ट्रेन के लिए यह समझौता किया। वह समझौता किया। लेकिन अब कहानी बदलने वाली है।
क्या बोले RITES चेयरमैन?
RITES के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल मिथल ने बताया कि कंपनी इंडियन रेलवे के साथ मिलकर एक ऐसा स्टैंडर्ड-गेज वंदे भारत प्लेटफॉर्म डिजाइन करने पर काम कर रही है जो इंटरनेशनल रेलवे सिस्टम के साथ कम्पैटिबल हो।
मिथल ने कहा, “हम रेलवे के साथ मिलकर स्टैंडर्ड-गेज वंदे भारत ट्रेनों के लिए डिजाइन तैयार करने और एक्सपोर्ट के लिए इसकी भविष्य की संभावनाओं को तलाशने पर काम कर रहे हैं।”
बुलेट ट्रेन और हाई स्पीट ट्रेन से सस्ती पड़ेगी वंदे भारत
भारत की हाई स्पीड ट्रेन वंदे अन्य देशों के हाई स्पीड ट्रेन से बहुत सस्ती है। 16-कोच वाली वंदे भारत ट्रेन को बनाने में लगभग ₹115 करोड़ से ₹150 करोड़ का खर्च आता है। वहीं, दूसरी ओर 10-कोच वाली बुलेट ट्रेन की अनुमानित लागत लगभग ₹460 करोड़ है। वंदे भारत अपग्रेड किए गए पारंपरिक ट्रैक पर चलती है, जबकि बुलेट ट्रेन के लिए महंगे और खास हाई-स्पीड इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। विकासशील देशों के लिए वंदे भारत ट्रेन एक बेहतर विकल्प हो सकती है।


