देश की जनता से पीएम मोदी की अपील पर राहुल गांधी का तंज

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पैदा हुए वैश्विक तेल संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लोगों से आग्रह किया कि वे ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ (घर से काम करने) की प्रथाओं को फिर से अपनाएं, ईंधन की खपत कम करें और देश को विदेशी मुद्रा बचाने में मदद करने के लिए एक साल तक शादियों के लिए सोना खरीदने से भी बचें।
इस पर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा कि ये उपदेश नहीं बल्कि नाकामी के सबूत हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखते हुए उन्होंने कहा, “मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे – सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं – ये नाकामी के सबूत हैं।”
‘जवाबदेही से बचते हैं’
राहुल गांधी ने आगे लिखा, “12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है – क्या खरीदे, क्या न खरीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि खुद जवाबदेही से बच निकलें। देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।”
पीएम मोदी ने क्या कहा था?
तेलंगाना के सिकंदराबाद में एक कार्यक्रम में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कोरोना काल के दौरान हमने ‘वर्क फ्रॉम होम’, ऑनलाइन मीटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंस जैसे तरीके अपनाए और कई ऐसी प्रणालियां विकसित कीं। हम इनके आदी भी हो गए थे। आज समय की मांग यह है कि हम उन प्रथाओं को फिर से शुरू करें, क्योंकि यह राष्ट्रीय हित में होगा और हमें एक बार फिर उन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल इतना महंगा हो गया है। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि पेट्रोल-डीजल खरीदने पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को भी पेट्रोल-डीजल की बचत करके बचाया जाए। मैं लोगों से अपील करूंगा कि वे एक साल तक शादियों के लिए सोना न खरीदें। खाने के तेल के मामले में भी यही बात लागू होती है। इसके आयात पर हमें विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “यदि हर घर खाने के तेल का इस्तेमाल कम कर दे तो यह देशभक्ति में एक बहुत बड़ा योगदान होगा। इससे राष्ट्रीय कोष का स्वास्थ्य भी सुधरेगा और परिवार के हर सदस्य का स्वास्थ्य भी। एक और क्षेत्र जो विदेशी मुद्रा का उपयोग करता है, वह है हमारा कृषि क्षेत्र। हम विदेशों से बड़ी मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का आयात करते हैं।”
उन्होंने कहा, “हमें रासायनिक उर्वरकों का अपना उपयोग आधा कर देना चाहिए और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए। इस तरह, हम विदेशी मुद्रा बचा सकते हैं और अपने खेतों तथा धरती मां की रक्षा कर सकते हैं।”




