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नामी यूनिवर्सिटी को टक्कर दे रहे अमेरिका के आम कॉलेज

अक्सर युवाओं और उनके माता-पिता को लगता है कि एक शानदार करियर और भारी-भरकम सैलरी के लिए हार्वर्ड, प्रिंसटन या एमआईटी जैसे किसी बड़े और नामी कॉलेज से पढ़ाई करना बेहद जरूरी है। 

अमेरिका की फोर्ब्स टॉप-500 कॉलेज रैंकिंग की हालिया रिपोर्ट ने इस सोच को पूरी तरह से बदल दिया है। इस रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि अच्छी कमाई के लिए आपके कॉलेज का मशहूर होना कोई शर्त नहीं है।

रैंकिंग के आंकड़े बताते हैं कि टॉप-500 लिस्ट में सबसे निचले पायदान पर मौजूद कॉलेजों के छात्र भी पढ़ाई पूरी करने के 10 साल बाद हर साल औसतन 95 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर रहे हैं।

एमआईटी और हार्वर्ड जैसे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ने वाले छात्र 10 साल बाद सालाना औसतन 1.15 करोड़ रुपये कमा रहे हैं।

वहीं, इस लिस्ट में 500वें नंबर पर ओहायो के एक ग्रामीण क्षेत्र में स्थित मेरिएटा कॉलेज है। हैरानी की बात यह है कि यहां के पूर्व छात्र भी 10 साल के अनुभव के बाद सालाना करीब 1 करोड़ रुपये कमा रहे हैं।

कुल मिलाकर, इस लिस्ट में शामिल लगभग हर कॉलेज के ग्रेजुएट्स की सालाना औसत कमाई 86 लाख रुपये से ऊपर है, जो यह साबित करता है कि कम मशहूर कॉलेज भी बेहतरीन करियर की नींव रख सकते हैं।

सिर्फ पैकेज देखकर न करें कॉलेज का चुनाव

हालांकि यह रिपोर्ट छोटे कॉलेजों की सफलता को दर्शाती है, लेकिन इसमें यह भी सलाह दी गई है कि किसी भी कॉलेज को चुनते समय सिर्फ पैकेज को आधार नहीं बनाना चाहिए। बड़े और मशहूर कॉलेजों में पढ़ने के अपने अलग फायदे होते हैं।

बड़े संस्थानों का अल्मनाई नेटवर्क बहुत विशाल होता है, जो करियर में आगे बढ़ने में काफी मदद करता है। एक नामी कॉलेज का टैग आपको भीड़ से अलग करता है। हालांकि, ये दोनों ही फायदे 10 साल बाद की कमाई के सीधे आंकड़ों में नजर नहीं आते, लेकिन जिंदगी भर काम आते हैं।

पढ़ाई का बढ़ते खर्च के कारण कर्ज का बोझ

एजुकेशन डेटा इनिशिएटिव की रिपोर्ट आज की शिक्षा व्यवस्था की एक कड़वी सच्चाई भी सामने लाती है। पिछले दो दशकों में कॉलेज की पढ़ाई का खर्च दोगुने से भी ज्यादा हो चुका है। महंगाई का आलम यह है कि आज के समय में सिर्फ एक बैचलर डिग्री पूरी करने के लिए छात्रों को औसतन 33 लाख रुपये से ज्यादा का एजुकेशन लोन लेना पड़ रहा है।

दुनिया के कई बड़े उद्योगपति भी अब इस बात से सहमत हैं कि केवल एक अच्छी डिग्री आपकी सफलता की पक्की गारंटी नहीं हो सकती। मेटा के संस्थापक मार्क जकरबर्ग का भी यही मानना है।

उनके मुताबिक, कॉलेज जाने का सबसे बड़ा फायदा नए लोगों से मिलना और मजबूत नेटवर्किंग बनाना है। लेकिन, उन्होंने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर यह सवाल भी उठाया है कि क्या आज के कॉलेज सच में युवाओं को भविष्य की अत्याधुनिक नौकरियों और चुनौतियों के लिए तैयार कर रहे हैं?

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