ब्रिक्स देशों के साथ 224 अरब डॉलर के व्यापार घाटे में भारत

भारत ब्रिक्स (BRICS) संगठन का एक संस्थापक सदस्य है और समूह के सदस्य देशों के साथ भारत के कारोबारी संबंधों का लगातार विस्तार हो रहा है।
हालांकि, आर्थिक मोर्चे पर भारत के सामने एक बड़ी चुनौती उभरकर सामने आई है। इस बात को ऐसे समझिए कि ब्रिक्स देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार के मामले में भारत को भारी-भरकम व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है।
224 अरब डॉलर पहुंचा व्यापार घाटा
भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, भारत का ब्रिक्स देशों के साथ कुल व्यापार घाटा 224 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस घाटे की सबसे बड़ी वजह को आप ऐसे समझिए कि हम रूस और चीन जैसे बड़े देशों से आयात काफी अधिक करते हैं, जबकि उनकी तुलना में हमारा निर्यात काफी कम है।
2021 से 2025 के बीच दोगुनी से अधिक बढ़ोतरी
बता दें कि कैलेनडर वर्ष 2021 में भारत का ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार घाटा 117 अरब डॉलर था, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 224 अरब डॉलर हो गया है। व्यापार घाटे में अकेले 100 अरब डॉलर से अधिक की हिस्सेदारी चीन की है, जिससे चीन पहले स्थान पर है। रूस के साथ भारत का व्यापार घाटा 55 अरब डॉलर है, जो इसे दूसरे स्थान पर रखता है।
ब्रिक्स देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार की स्थिति क्या?
| देश | व्यापार संतुलन (अरब डॉलर में) | स्थिति |
| चीन | -112.16 | घाटा |
| रूस | -50.00 | घाटा |
| यूएई (UAE) | -26.53 | घाटा |
| सऊदी अरब | -20.00 | घाटा |
| इंडोनेशिया | -15.80 | घाटा |
| ब्राजील | -1.03 | घाटा |
| दक्षिण अफ्रीका | -0.15 | घाटा |
| मिस्र (Egypt) | +1.27 | लाभ |
| इथियोपिया | +0.19 | लाभ |
भारत के निर्यात में ब्रिक्स देशों की कितनी हिस्सेदारी?
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों की माने तो भारत से होने वाले कुल निर्यात में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी अलग-अलग है।
यूएई (UAE)- 39% (सबसे बड़ा निर्यात साझेदार)
चीन- 20.3%
सऊदी अरब- 10.7%
रूस- 4.7%
इंडोनेशिया- 4.7%
अब भारत के आयात का आंकड़ा भी समझिए
वहीं बात अब भारत के आयात के आंकड़ों की करें तो भारत की तरफ से किए जाने वाले कुल आयात की हिस्सेदारी बहुत अलग-अलग है।
चीन- 40.9% (सबसे बड़ा आयात स्रोत)
यूएई (UAE)- 19.9%
रूस- 17.2%
सऊदी अरब- 9.6%
इंडोनेशिया- 6.3%
वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ा ब्रिक्स का दबदबा
अच्छा, गौर करने वाली बात यह है कि वैश्विक आर्थिक मंच पर ब्रिक्स (BRICS) संगठन का प्रभाव तेजी से मजबूत हो रहा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया की अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स देश अब एक बेहद निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की बात करें तो दुनिया के कुल वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स देशों का योगदान 40% तक पहुंच चुका है। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय लेन-देन और व्यापार के मोर्चे पर भी इस समूह की पकड़ मजबूत हुई है, जहां वैश्विक व्यापार में ब्रिक्स देशों की कुल हिस्सेदारी 26% दर्ज की गई है।
ब्रिक्स देशों में अप्रवासी भारतीयों के आंकड़े
विदेश में रहने वाले हर चार भारतीयों में से एक भारतीय ब्रिक्स देशों में निवास करता है। ब्रिक्स देशों में अप्रवासी भारतीयों की संख्या जानिए।
| देश | अप्रवासी भारतीयों की संख्या |
| यूएई (UAE) | 43.4 लाख |
| सऊदी अरब | 27.5 लाख |
| दक्षिण अफ्रीका | 18 लाख |
| चीन | 56,137 |
| ईरान | 9,488 |
| इंडोनेशिया | 7,251 |
| ब्राजील | 5,987 |
| मिस्र | 5,690 |
| रूस | 2,606 |
| इथियोपिया | 2,500 |
भारत के व्यापार के लिए कैसे बना चुनौती?
गौरतलब है कि आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि जहां एक तरफ ब्रिक्स देश वैश्विक जीडीपी (40%) और व्यापार (26%) में अपनी मजबूत पकड़ बना चुके हैं, वहीं भारत के लिए चीन और रूस जैसे देशों से भारी आयात के कारण व्यापार घाटा एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हालांकि, यूएई जैसे देशों के साथ मजबूत निर्यात संबंध और वहां रहने वाली 43.4 लाख भारतीयों की विशाल आबादी भारत के सामरिक व आर्थिक हितों को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाती है।



