
हरियाणा के गांवों में भी अपशिष्ट जल प्रबंधन पर काम हो रहा है। पांच परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि सात पर काम जारी है।
दिल्ली-एनसीआर की खराब होती हवा के बीच हरियाणा ने प्रदूषण रोकने के लिए सीवेज से लेकर पराली और वाहनों के धुएं तक कई मोर्चों पर काम तेज किया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीरवार को यमुना एक्शन प्लान और एनसीआर की वायु गुणवत्ता सुधार से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने विभागों को लंबित काम तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।
यमुना बेसिन में 132 एमएलडी क्षमता के छह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए जा रहे हैं। बजघेड़ा, खेड़वा, रादौर रोड, ददलाना, बादशाहपुर और सोढापुर की इन परियोजनाओं को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा गोहाना, सुनारिया, लाइन पार बहादुरगढ़, हसनपुर, धनवापुर और बहरामपुर में 304 एमएलडी क्षमता के छह एसटीपी के उन्नयन का काम चल रहा है।
औद्योगिक प्रदूषण रोकने के लिए फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में 50 एमएलडी क्षमता के साझा औद्योगिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। पानीपत में ड्रेन नंबर-2 में औद्योगिक अपशिष्ट का प्रवाह रोकने के लिए 14 इकाइयों का निरीक्षण किया गया, जिनमें चार के खिलाफ कार्रवाई हुई है।
गांवों में भी अपशिष्ट जल प्रबंधन पर काम हो रहा है। पांच परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि सात पर काम जारी है। सोनीपत के राय-जाखौली में 400 टन प्रतिदिन क्षमता का बायोगैस संयंत्र निर्माणाधीन है।
हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए पुराने ट्रक और बस बदलने की योजना का पोर्टल शुरू हो चुका है। पराली जलाने से रोकने के लिए खेत में और खेत से बाहर, दोनों स्तरों पर प्रबंधन पर जोर है। छोटे जैव ईंधन संयंत्रों को बढ़ावा देने की तैयारी है। वहीं वन विभाग को पौधारोपण और छोटे हरित क्षेत्रों के विकास में तेजी लाने को कहा गया है।




