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एक्सपर्ट ने दी चेतावनी, इन गलतियों से स्ट्रोक का बढ़ता है खतरा

क्या आप जानते हैं कि आपका दिमाग आपकी उम्र से कहीं ज्यादा आपकी आदतों से बूढ़ा होता है? हम क्या खाते हैं, कैसे रहते हैं, इन सभी का असर हमारे दिमाग पर पड़ता है। हम में से ज्यादातर लोग अनजाने में ऐसी आदतें अपना लेते हैं, जो धीरे-धीरे हमारे दिमागी को नुकसान पहुंचाती हैं। 

डॉ. सुधीर कुमार (MD DM) ने ऐसी ही 7 सामान्य आदतों के बारे में आगाह किया है, जो हमारे दिमाग को चुपके-चुपके नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए अगर आप अपनी याददाश्त को लंबे समय तक बरकरार रखना चाहते हैं, तो इन 7 आदतों को आज ही बदलने की जरूरत है।

6 घंटे से कम की नींद लेना

नींद केवल शरीर की थकान मिटाने के लिए नहीं, बल्कि दिमाग की सर्विसिंग के लिए जरूरी है। अगर आप रोजाना 6 घंटे से कम सोते हैं, तो आपकी याददाश्त में गिरावट आने लगती है। इतना ही नहीं, आपका रिएक्शन टाइम भी कम हो जाता है और भविष्य में स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है।

दिन भर बैठे रहना
आजकल की डेस्क जॉब हमें घंटों एक ही जगह बैठने पर मजबूर कर देती है, लेकिन 8 से 10 घंटे लगातार बैठे रहना दिल की बीमारियां और डिमेंशिया के जोखिम को भी बढ़ा देता है। फिजिकली एक्टिव न रहना दिमाग के लिए जहर के जैसा है।

रात में देर तक स्क्रीन स्क्रॉल करना
सोने से ठीक पहले मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करना आपके दिमाग के स्लीप हार्मोन यानी मेलाटोनिन को दबा देता है। इससे आप गहरी नींद नहीं ले पाते। बिना गहरी नींद के दिमाग खुद को रिपेयर नहीं कर पाता, जिससे अगले दिन मानसिक थकान बनी रहती है।

एक्सरसाइज से दूरी बनाना
एक्सरसाइज न करने से शरीर के साथ-साथ दिमाग की ग्रोथ भी रुक जाती है। शारीरिक गतिविधि की कमी से BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) प्रोटीन कम हो जाता है, जो दिमाग के सेल्स के विकास और रखरखाव के लिए जिम्मेदार होता है।

बीपी और शुगर को नजरअंदाज करना
अनियंत्रित ब्लड प्रेशर और शुगर केवल दिल के दुश्मन नहीं हैं। ये दिमाग की छोटे ब्लड वेसल्स को चुपचाप नुकसान पहुंचाते हैं। इससे साइलेंट ब्रेन डैमेज होता है और स्ट्रोक की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

क्रोनिक स्ट्रेस
तनाव केवल आपके मूड को खराब नहीं करता, बल्कि यह शारीरिक रूप से आपके दिमाग को सिकोड़ देता है। लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव दिमाग के हिप्पोकैम्पस के वॉल्यूम को कम कर देता है, जो सीखने और याददाश्त का मुख्य केंद्र है।

खर्राटों को हल्के में लेना
अगर आप सोते समय तेज खर्राटे लेते हैं, तो यह स्लीप एप्निया का संकेत हो सकता है। इसमें नींद के दौरान ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे ब्रेन फॉग की स्थिति बनती है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

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