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ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार ने केरोसिन के नियमों में दी ढील

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को खाना पकाने के लिए वैकल्पिक ईंधन के रूप में 48,000 किलोलीटर (केएल) अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है। यह नियमित मासिक कोटे (लगभग 1 लाख किलोलीटर) से अतिरिक्त है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि वे जिलों में वितरण के लिए जगहों की पहचान करें और इसे मुख्य रूप से राशन दुकानों या निर्दिष्ट स्थानों पर बांटें। लेकिन राज्यों की तरफ से इस योजना को लेकर खास उत्साह नहीं दिख रहा है।

सुपीरियर केरोसिन ऑयल का आवंटन

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अभी तक सिर्फ 17 राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों ने एसकेओ (सुपीरियर केरोसिन ऑयल) आवंटन के आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख ने साफ-साफ बता दिया है कि उनके यहां केरोसिन की कोई जरूरत नहीं है। कई अन्य राज्य अभी भी आदेश जारी करने में हिचकिचा रहे हैं।

विशेषज्ञों और राज्य प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि अब बहुत कम लोगों के पास केरोसिन पर चलने वाले स्टोव या चूल्हे बचे हैं। कई राज्यों (जैसे राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि) में 2017 के आसपास ही पीडीएस के जरिए केरोसिन का वितरण बंद कर दिया गया था।

केरोसिन इस्तेमाल का कोई साधन नहीं

नतीजतन, लोगों के पास केरोसिन इस्तेमाल का कोई साधन नहीं है। दूसरा, यह अतिरिक्त आवंटन काफी कम माना जा रहा है। तीसरा, केंद्र ने निर्देश दिया है कि हर जिले में सिर्फ दो जगरों पर ही इसका वितरण हो। राज्य प्रशासन का कहना है कि एक बार लोग बाजार से स्टोव खरीदकर केरोसिन इस्तेमाल शुरू कर दें, तो बाद में अगर नियमित सप्लाई न मिली तो स्थिति और खराब हो सकती है। यह लोकप्रिय फैसला नहीं होगा।

हिमाचल प्रदेश और लद्दाख ने साफ कह दिया है कि उन्हें केरोसिन की जरूरत नहीं है।दरअसल, केंद्र सरकार पिछले एक दशक से केरोसिन को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की नीति पर चल रही थी। स्वच्छ ईंधन (एलपीजी) को बढ़ावा देने और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटीके) योजना के तहत कई राज्यों को केरोसिन का कोटा सौंपने के बदले नकद प्रोत्साहन दिया गया।

पीडीएस केरोसिन मुक्त

नतीजा यह कि 21 राज्य व केंद्रशासित प्रदेश अब पीडीएस केरोसिन मुक्त हो चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में पीडीएस के जरिए सिर्फ 10,60,524 किलोलीटर का केरोसिन आवंटन था। सबसे ज्यादा 66 फीसद अकेले पश्चिम बंगाल को (7,04,016 केएल) मिला था। जबकि दस साल पहले (2015-16) यह आंकड़ा 86 लाख किलोलीटर के करीब था।

अब नियमित मासिक कोटा भी करीब एक लाख किलोलीटर है, जो पहले के मुकाबले बहुत कम है।पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि यह अतिरिक्त आवंटन अस्थायी है और पश्चिम एशिया संकट के चलते एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए किया गया है। लेकिन राज्य स्तर पर वितरण व्यवस्था, स्टोव की उपलब्धता और भविष्य की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण योजना पर अमल में देरी हो रही है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि केरोसिन मुख्य रूप से राशन कार्डधारकों को खाना पकाने और रोशनी के लिए दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल कई राज्यों में तैयारियां पूरी नहीं हो पाई हैं। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी पब्लिक सेक्टर की तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा चलाए जा रहे कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों को केरोसिन स्टोर करने और बेचने की इजाजत दी गई है। हर तय रिटेल आउटलेट को 5,000 लीटर तक केरोसिन स्टोर करने की इजाजत है।

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