
नीरज के चाचा भीम चोपड़ा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि नीरज ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। उसने यह साबित कर दिया है कि निरंतर मेहनत और अनुशासन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
खंडरा के लाल नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा दिया है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के भाला फेंक फ़ाइनल में नीरज ने अपने चिर-परिचित अंदाज में 85.83 मीटर के साथ रजत पदक देश की झोली में डाल दिया। इस ऐतिहासिक जीत की खबर मिलते ही नीरज के पैतृक गांव खंडरा में जश्न का माहौल बन गया।
नीरज की इस उपलब्धि पर उनके पिता सतीश कुमार और माता सरोज देवी की आंखें खुशी से छलक आईं। जीत के बाद माता सरोज देवी ने कहा कि हमारे बेटे की मेहनत और देशवासियों की दुआएं रंग लाई हैं। नीरज ने एक बार फिर पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। वहीं पिता सतीश कुमार ने कहा कि नीरज का समर्पण ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है, वह हर प्रतियोगिता में देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करता है।
चाचा बोले- भतीजे ने फिर रच दिया इतिहास
नीरज के चाचा भीम चोपड़ा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि नीरज ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। उसने यह साबित कर दिया है कि निरंतर मेहनत और अनुशासन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
चैंपियन का लगातार स्वर्णिम सफर
नीरज चोपड़ा का यह प्रदर्शन उनकी निरंतरता का प्रमाण है। इससे पहले भी नीरज ने पेरिस ओलंपिक्स 2024 में 89.45 मीटर थ्रो के साथ रजत पदक जीता। टोक्यो ओलंपिक्स 2020 में 87.58 मीटर के साथ ऐतिहासिक गोल्ड, वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023 (बुडापेस्ट) में 88.17 मीटर और एशियन गेम्स 2023 (हांगझोउ) में 88.88 मीटर भाला फेंककर भारत को स्वर्णिम सफलता दिलाई है।
दोहा डायमंड लीग 2025 में 90.23 मीटर के अपने पर्सनल बेस्ट थ्रो के साथ नीरज पहले ही दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीटों में शामिल हो चुके हैं। कॉमनवेल्थ 2026 की यह नई उपलब्धि उनके इसी शानदार और बेमिसाल सफर का एक नया अध्याय है। उन्होंने रजत पदक जीता है।




